
पत्रिका एक्सक्लूसिव-कृष्ण चौहान
श्रीगंगानगर.प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का तेजी से विस्तार तो हुआ है लेकिन इसकी बुनियाद अब कमजोर नजर आने लगी है। राज्य में संचालित 3737 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में करीब 6.81 लाख से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है। विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की भारी कमी ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कागजों में 49 हजार से अधिक स्टाफ दर्शाया जा रहा है। हकीकत यह है कि विज्ञान, गणित और अंग्रेजी विषय के व्याख्याताओं के पद बड़ी संख्या में खाली हैं। पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को दो से तीन विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां अंग्रेजी माध्यम के नाम पर बच्चों को बिना विशेषज्ञ शिक्षकों के पढ़ाया जा रहा है। इसका असर विद्यार्थियों की बुनियादी समझ पर पड़ रहा है।
शिक्षा विभाग फिलहाल गेस्ट फैकल्टी और आंतरिक समायोजन के जरिए व्यवस्था संभाल रहा है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। नए शैक्षणिक सत्र से पहले यह बड़ा सवाल है कि क्या सरकार मांग के अनुरूप विषय विशेषज्ञों की भर्ती कर पाएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्कूल खोलना पर्याप्त नहीं, गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है, अन्यथा यह मॉडल अपनी विश्वसनीयता खो सकता है।
राज्य में 34 जिलों में संचालित 134 स्वामी विवेकानंद मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में 62,291 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यहां 2577 स्टाफ कार्यरत है, फिर भी विषय विशेषज्ञों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए अंग्रेजी माध्यम में दाखिला दिलाया, लेकिन विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। निजी स्कूलों की फीस हर किसी के बस की बात नहीं है।
राकेश कुमार, अभिभावक, श्रीगंगानगर।
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की कमी को चरणबद्ध तरीके से दूर किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार गेस्ट फैकल्टी और आंतरिक समायोजन किया गया है। नए सत्र से पहले रिक्त पद भरने के प्रयास जारी हैं।
अरविंदर सिंह, सीडीईओ, शिक्षा विभाग, श्रीगंगानगर।
Published on:
08 Apr 2026 01:11 pm
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