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अब बच्चों की असली सीखने की क्षमता का होगा आकलन

आकलन कार्य डाइट के माध्यम से कराया जाएगा और छात्राध्यापकों की मदद से स्कूलों में बच्चों के अधिगम स्तर की जांच होगी।
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श्री गंगानगर

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Krishan Ram

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Updated: 28 May 2026, 9:11 PM IST

learning ability of children

श्रीगंगानगर के महात्मा गांधी पुलिस लाइन पांच नंबर स्कूल में कक्षा के दौरान अध्ययन करते विद्यार्थी।

श्रीगंगानगर.पीएम श्री योजना के तहत चयनित स्कूलों में अब विद्यार्थियों का मूल्यांकन केवल लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार ने कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक और सहशैक्षणिक स्तर का व्यापक आकलन कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत यह भी परखा जाएगा कि स्कूलों में उपलब्ध कराई गई आर्ट किट, एबीएल किट, वर्कबुक, निपुण कैलेंडर और हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड जैसी सामग्री बच्चों की सीखने की क्षमता पर कितना प्रभाव डाल रही है।

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार राज्य के 649 पीएमश्री विद्यालयों में यह विशेष आकलन वार्षिक परीक्षा से पहले कराया जाएगा। इसमें श्रीगंगानगर जिले के 20 से अधिक पीएमश्री विद्यालय भी शामिल हैं। आकलन कार्य डाइट के माध्यम से कराया जाएगा और छात्राध्यापकों की मदद से स्कूलों में बच्चों के अधिगम स्तर की जांच होगी।

आरएससीईआरटी उदयपुर को असेसमेंट टूल तैयार करने और प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं डाइट स्तर पर नोडल प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे, जो विद्यालयों से समन्वय स्थापित कर पूरी प्रक्रिया को संपादित करेंगे। इसके बाद विद्यालयवार डेटा एकत्र कर समेकित रिपोर्ट राज्य स्तर पर भेजी जाएगी।

भविष्य की शैक्षणिक रणनीति में अहम भूमिका

शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निपुण भारत मिशन के तहत संचालित गतिविधियां बच्चों की बुनियादी भाषा और गणितीय दक्षता को कितना मजबूत कर रही हैं। साथ ही शिक्षकों को उपलब्ध कराई गई अधिगम सामग्री शिक्षण प्रक्रिया में कितनी उपयोगी साबित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब शिक्षा व्यवस्था में केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक सीखने की क्षमता, रचनात्मकता और गतिविधि आधारित शिक्षा पर भी फोकस किया जा रहा है।

ऐसे में यह आकलन भविष्य की शैक्षणिक रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निपुण भारत मिशन के तहत संचालित गतिविधियां बच्चों की बुनियादी भाषा और गणितीय दक्षता को कितना मजबूत कर रही हैं। साथ ही शिक्षकों को उपलब्ध कराई गई अधिगम सामग्री शिक्षण प्रक्रिया में कितनी उपयोगी साबित हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब शिक्षा व्यवस्था में केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक सीखने की क्षमता, रचनात्मकता और गतिविधि आधारित शिक्षा पर भी फोकस किया जा रहा है। ऐसे में यह आकलन भविष्य की शैक्षणिक रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

क्या होगा आकलन में

राज्य के 649 पीएमश्री विद्यालय शामिल

कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों का मूल्यांकन

निपुण भारत मिशन की गतिविधियों का प्रभाव जांचा जाएगा

आर्ट किट, एबीएल किट और वर्कबुक के उपयोग का मूल्यांकन

वर्जन

पीएमश्री विद्यालयों में विद्यार्थियों के अधिगम स्तर और गतिविधि आधारित शिक्षा के प्रभाव का आकलन किया जाएगा। इससे शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों की बुनियादी दक्षताओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

अरविंदर सिंह, सीडीईओ, श्रीगंगानगर

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