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‘जीने के अधिकार का अभिन्न अंग है बिजली’- केरल हाइकोर्ट

बिजली कनेक्शन देरी से देने पर दिया राज्य बिजली विभाग के दो कर्मचारियों के विरुद्ध फैसला

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Mar 23, 2021
'जीने के अधिकार का अभिन्न अंग है बिजली'- केरल हाइकोर्ट
'जीने के अधिकार का अभिन्न अंग है बिजली'- केरल हाइकोर्ट

जीवन के लिए जरूरी चीजों में केवल रोटी, कपड़ा और मकान ही नहीं, पर्याप्त बिजली और पीने योग्य पानी की उपलब्धता भी जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है। हाल ही केरल उच्च न्यायालय ने निर्णय देते हुए राज्य बिजली विभाग के दो कर्मचारियों को राहत देने से इनकार कर दिया। दोनों कर्मचारियों ने एक व्यक्ति को बिजली कनेक्शन देने में देरी की थी। जस्टिस मुरली पुरुषोत्तम ने कहा कि, 'बिजली, जीवन में एक बुनियादी आवश्यकता है। पानी और बिजली भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है।'

यह भी कहा न्यायालय ने

वैधानिक कर्तव्य है
विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 43 का उल्लेख करते हुए एकल पीठ ने कहा कि बिजली आपूर्ति के आवेदन की प्राप्ति के एक महीने के भीतर आवेदक को विद्युत कनेक्शन देना वितरण लाइसेंसधारी का वैधानिक कर्तव्य है।

विभाग की यह आपत्ति
मामले में बिजली विभाग के दोनों कर्मचारियों ने आपत्ति जताई थी कि आवेदक सैनुद्दीन के घर का निर्माण लो-टेंशन (एलटी) लाइन से निर्धारित दूरी बनाए बिना किया गया था। एलटी लाइन शिफ्ट होने के बाद ही बिजली कनेक्शन की अनुमति मिलेगी।

इसलिए लगाया जुर्माना
सीजीआरएफ (CGRF) के सामने सैनुद्दीन की शिकायत पर फोरम ने विभाग को निर्देश दिया कि वे सैनुद्दीन से अनुमानित राशि लेने के बाद 21 दिनों के अंदर उक्त एलटी लाइन को स्थानान्तरित कर दें। राशि जमा होने के बाद भी दोनों कर्मचारियों द्वारा सैनुद्दीन को बिजली कनेक्शन देने का कोई प्रयास नहीं किया। गया था। इसी मनमानी पर फोरम ने दोनों कर्मचारियों पर जुर्माना भी लगाया था।

Published on:
23 Mar 2021 01:10 pm