जबलपुर

आय एक भी रुपए नहीं, नगर निगम में ‘वित्तीय आपातकाल’

जबलपुर का ई-नगर पालिका पोर्टल 18 दिसंबर से बंद      

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Jan 14, 2024
nigam

ये काम कराने हैं निगम को
-79 वार्डों में विकास के काम
-75-75 लाख के काम होने हैं 10 वार्ड में
-60-60 लाख के विकास कार्य 69 वार्ड में
निगम का मासिक खर्चा
-05 करोड़ रुपये बिजली बिल
-01 करोड़ डीजल खर्च
-07 करोड़ आउट सोर्स भुगतान
-14 करोड़ कर्मचारियों का वेतन व पेंशन
-01 करोड़ कर्मचारियों का क्लेम
-28 करोड़ कुल सामान्य खर्चे
-80 करोड़ रुपए सीवर प्रोजेक्ट में जो निगम को देना है हिस्सेदारी

2030 तक जारी रहेगा लोन का भुगतान
-196 करोड़ एडीबी का लोन
-18 करोड़ सालाना किश्त का भुगतान
-95.25 करोड़ हुडको का लोन
-01 करोड़ हर तिमाही में जमा होती है हुडको के लोन की किश्त

सामान्य दिनों में मासिक आय
-18 करोड़ चुंगी क्षतिपूर्ति
-8 करोड़ सम्पत्ति कर, जल शुल्क, लायसेंस शुल्क व अन्य मद से आय
-20 करोड़ कुल आय

जबलपुर। नगर निगम की कोई आय नहीं हो रही है। हालत यह है कि ई-नगर पालिका पोर्टल 18 दिसंबर से बंद है। 10 तारीख तक प्रदेश शासन से आने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति राशि भी नहीं आई। ऐसे में आर्थिक तंगी से जूझ रहे 17.50 लाख की आबादी वाले जबलपुर नगर निगम में ‘वित्तीय आपातकाल’ आ गया है। नगर सरकार से लेकर निगम प्रशासन के अधिकारी स्वयं ये हकीकत बयां कर रहे हैं। हालात ये हैं कि वेतन, पेंशन का भी मुश्किल से भुगतान हो रहा है। कुछ दिन ऐसे ही हालात रहे, तो रूटीन के काम पर भी असर पड़ सकता है।

शुरू होने हैं विकास कार्य
जबलपुर. इस सबके बीच शहर के वार्डों में सड़क, ड्रेनेज, पुलिया निर्माण के काम शुरू होने हैं। शहरवासी हर वार्ड में छोटे-छोटे काम के लिए पार्षदों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। पार्षदों की मांग पर निगम प्रशासन ने वार्ड स्तर पर 60 से लेकर 75 करोड़ रुपए तक के काम करने को स्वीकृति दी है। इस सबके बीच नगर निगम पर केंद्रीय और राज्य की योजनाओं की खर्च हुई राशि में अपने हिस्से के अंशदान का भी भुगतान करना है। यह राशि भी 80 करोड़ रुपए के होगी।

आय के चंद साधन
निगम के आय के स्रोतों में सम्पत्ति कर, जल शुल्क, बाजार बैठकी, लायसेंस शुल्क, दुकानों का किराया ही शामिल है। आय-व्यय के संतुलन की बात करें, तो निगम पर करोड़ों का भार है। उसे ऋण की किस्तों का भी भुगतान करना होता है। इसके अलावा एडीबी और हुडको का ऋण भी है, जिसकी किश्तें देनी होती हैं।


नगर निगम की वित्तीय हालत बेहद नाजुक है। 18 दिसंबर से ई-नगर पालिका पोर्टल बंद होने के बाद से कोई आय नहीं हो रही है। शासन से मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि प्राप्त नहीं हो सकी है। वित्तीय आपातकाल जैसे हालात हैं। वेतन-पेंशन का भुगतान मुश्किल से हो पा रहा है।

वीएन वाजपेयी, अपर आयुक्त वित्त, नगर निगम

Published on:
14 Jan 2024 07:30 pm
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