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पंजाब-हरियाणा के बाद एमपी में फैला ‘गेहूं का मामा’, फसल का कर रहा नाश

MP News: 'गेहूं का मामा' कहलाने वाला यह खरपतवार गेहूं जैसा दिखता है। यह फसल को चपेट में लेकर पौधों की जड़ों को जकड़ कर ग्रोथ प्रभावित करता है...

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wheat crop

wheat crop प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

MP News: पंजाब-हरियाणा में गेहूं पर समस्या बना 'गेहूं का मामा' अब मप्र में तेजी से फैल रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने इस खरपतवार के बढ़ते प्रकोप की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में जबलपुर, खरगोन, विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, कटनी, नरसिंहपुर सहित अन्य जिलों में इसके प्रकोप की पुष्टि की है। इसने किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। समय पर नियंत्रण नहीं किया तो गेहूं की फसल चौपट हो सकती है।

रसायन हो रहे निष्प्रभावी

जांच में सामने आया है कि खरपतवार नियंत्रण के लिए उपयोग किए जा रहे कई रसायन अब निष्प्रभावी हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण बाजार में उपलब्ध निम्न गुणवत्ता वाले, हल्के और सस्ते रसायनों का लगातार उपयोग बताया जा रहा है। साथ ही किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेने के बजाय एक-दूसरे से पूछकर बिना जानकारी के दवाओं का चयन कर लेते हैं, जिससे समस्या और बढ़ रही है।

पहचान में धोखा, नुकसान दोगुना

'गेहूं का मामा' कहलाने वाला यह खरपतवार गेहूं जैसा दिखता है। यह फसल को चपेट में लेकर पौधों की जड़ों को जकड़ कर ग्रोथ प्रभावित करता है। शुरुआती अवस्था में यह बिल्कुल गेहूं की तरह दिखता है। इसमें भी बाली निकलती है, लेकिन बालियों में कांटे नहीं होते और कॉलर वाला हिस्सा हल्के गुलाबी रंग का दिखाई देता है। इसी समानता के कारण किसान समय पर पहचान नहीं कर पाते और तब तक यह खेत में फैल चुका होता है।

फसल में 30 से 35 फीसदी तक नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर नियंत्रण नहीं होने पर खरपतवार गेहूं के उत्पादन में 30-35% तक असर दिखा सकता है। यह गेहूं के साथ पोषक तत्वों, पानी और खाद को प्रभावित कर फसल कमजोर करता है। दाने भराव कम होने से उत्पादन पर असर पड़ता है। केवल जबलपुर में 1.5 लाख हेक्टेयर रकबे में उत्पादन 50 हजार टन है। बता दें, मप्र 90 लाख हेक्टेयर उत्पादन के साथ देश में दूसरे स्थान पर है।

तेजी से बढ़ता है…

आइसीएआर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विजय चौधरी ने बताया, पहले यह खरपतवार दिखाई नहीं देता था, लेकिन अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ी है। प्रदेश के कई जिलों में जांच के दौरान गेहूं की फसल में यह मिला है, जो चिंताजनक है। बुवाई के समय सावधानी बरतें व अच्छी गुणवत्ता की दवा उपयोग करें। शुरुआत में नियंत्रण करें तो 95% तक रोक सकते हैं।

पहले हमें लगा कि खेत में गेहूं ही अच्छी तरह बढ़ रहा है, लेकिन बाद में पता चला कि वह गेहूं का मामा है। अब पैदावार साफ तौर पर घटती दिख रही है। - रामकिशोर पटेल, किसान

हमने दवाइयों का छिड़काव किया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। बाद में कृषि विभाग से जानकारी मिली कि गलत रसायन इस्तेमाल करने से यह खरपतवार और मजबूत हो गया। - सुनील रैकवार, किसान