सांसदों के आचरण पर बात करते हुए बेनीवाल ने अपना पुराना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, "मैं खुद चार बार विधायक रहा और पांच बार निलंबित हुआ।
संसद के मौजूदा सत्र में 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन के बाद सदन की कार्यवाही ठप पड़ी है। इस घटनाक्रम पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। बेनीवाल ने कहा कि बात-बात पर सांसदों को निलंबित करना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने सत्ता पक्ष को सलाह दी है कि उन्हें विपक्ष, विशेषकर छोटे दलों की बात सुनने की ताकत रखनी चाहिए।
सांसद हनुमान बेनीवाल ने सदन के भीतर चल रहे गतिरोध पर कहा कि संसद बहस के लिए है, न कि एकतरफा कार्यवाही के लिए। उन्होंने कहा, "जब राहुल गांधी या अन्य विपक्षी नेता अपनी बात रख रहे थे, तो उन्हें सुना जाना चाहिए था। आखिर सुनने में क्या हर्ज है? सत्ता पक्ष को सुनने की ताकत रखनी चाहिए।"
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को सुझाव दिया कि निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई से पहले सभी दलों के साथ बैठकर संवाद स्थापित करना चाहिए था।
बेनीवाल ने सांसदों के निलंबन से छोटे दलों को होने वाले नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा,
"पिछले बार भी हाउस ऐसे ही चला और इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। इस बखेड़े में हम जैसे छोटे दल अपने क्षेत्र और देश के मुद्दे कब उठा पाएंगे? हमारा पूरा समय तो पक्ष-विपक्ष की इस लड़ाई को देखने में ही गुजर जाता है।"
हनुमान बेनीवाल ने 'इंडिया अलायंस' (INDIA Alliance) की गुटबाजी पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि सरकार को अच्छी तरह पता है कि विपक्ष बिखरा हुआ है और दलों में बंटा है। इसी का फायदा उठाकर सरकार विपक्ष को नजरअंदाज कर रही है। बेनीवाल के अनुसार, सत्ता पक्ष चाहता है कि सदन में व्यवधान होता रहे और वे समय पास करते रहें ताकि मुख्य मुद्दों पर चर्चा ही न हो पाए।
सांसदों के आचरण पर बात करते हुए बेनीवाल ने अपना पुराना अनुभव साझा किया। उन्होंने स्वीकार किया कि सांसदों को मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन कई बार परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि व्यक्ति आक्रामक हो जाता है।
उन्होंने कहा, "मैं खुद चार बार विधायक रहा और पांच बार निलंबित हुआ। जब आपकी बात नहीं सुनी जाती, तो गुस्सा आना स्वाभाविक है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हमेशा सदन और 'चेयर' (अध्यक्ष) का सम्मान करते आए हैं और कभी कोई अमर्यादा नहीं की।
बेनीवाल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन में राष्ट्रपति का अभिभाषण और बजट जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय लंबित हैं। उन्होंने सवाल किया, "अगर आप सांसदों को निलंबित करते रहेंगे, तो इन विषयों पर बहस किसके साथ करेंगे? सरकार तो चाहती ही नहीं कि हाउस चले।" उन्होंने मांग की कि निलंबन की कार्रवाई वापस ली जाए ताकि देश के जरूरी मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके।