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जापान में करोड़ों डॉलर की 900 लग्जरी घड़ियां हो गईं गायब

इन लग्जरी घड़ियों की कीमत लगभग 1.3 करोड़ डॉलर है। घड़ियों को किराए पर देने वाली साइट बंद हो गई है और उसका मालिक दुबई भाग गया है। पुलिस अब उसकी तलाश में है।
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Updated: 10 Mar 2024, 12:54 PM IST
जापान में करोड़ों डॉलर की 900 लग्जरी घड़ियां हो गईं गायब
जापान में करोड़ों डॉलर की 900 लग्जरी घड़ियां हो गईं गायब

टोक्यो। दुनियाभर में टाइम देखने के लिए नई से नई तकनीक आने के बावजूद घड़ियों का चलन आज भी बरकरार है। मार्केट में खूबसूरत डिजाइन के साथ बड़े-बड़े ब्रांड्स की महंगी घड़ियां मौजूद हैं। अब जापान से खबर है कि यहां किराए पर दी जाने वाली 900 लग्जरी घड़ियां गायब हो गई हैं। इन लग्जरी घड़ियों की कीमत लगभग 1.3 करोड़ डॉलर है। घड़ियों को किराए पर देने वाली साइट बंद हो गई है और उसका मालिक दुबई भाग गया है। पुलिस अब उसकी तलाश में है।

अन्य नीलामी साइट्स पर देखी गई घड़ियां:
असल में बड़े-बड़े ब्रांड्स वाली घड़ियों के मालिक, पश्चिमी जापान की ओसाका स्थित रेंटल सर्विस टोके मैच को इन्हें उधार देकर धन कमाया करते थे। इन घड़ियों को टोके मैच ग्राहकों को किराए पर देती थी। टोके मैच संचालित करने वाली कंपनी नियो रिवर्स ने जनवरी के अंत में अपनी सेवा समाप्त करने की घोषणा की और वादा किया कि वह सभी घड़ियां वापस कर देगी। लेकिन लगभग 900 घड़ियों के मालिकों को उनकी घड़ियां वापस नहीं मिल पाई हैं। इनमें से कुछ घड़ियों को अन्य ऑनलाइन नीलामी साइट पर भी देखा गया, जिसके बाद मालिकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

इतना आसान भी नहीं ऐसा व्यवसाय करना:

पिछले कुछ वर्षों में कीमती घड़ियों को किराए पर लेने का चलन जापान में कई कारणों से बढ़ा है। इनमें इन घड़ियों को वहन करने की कीमत, डिजाइन और महंगे मॉडल को हाथ में पहनने जैसा सुकून आदि शामिल है। इसके अलावा ऐसे व्यवसाय छोटे व्यापारियों को बड़ा लाभ प्रदान करते हैं। हालांकि इनके रख-रखाव से लेकर चोरी होने की आशंका जैसी चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं।

जापान में बढ़ रही 'साझा अर्थव्यवस्था':

शेयरिंग इकोनॉमी एसोसिएशन जापान (एसइएजे) के अनुसार इस देश में कुछ बेशकीमती घड़ियों का कारोबार सेकंड-हैंड स्टोर्स में भी किया जा रहा है। इसमें नियो रिवर्स भी एक सदस्य था। एसइएजे के आंकड़े बताते हैं कि जापानी साझा अर्थव्यवस्था वास्तव में बढ़ रही है, जिसका मूल्य 2023 में १७ अरब डॉलर था। 'साझा अर्थव्यवस्था' ऐसी प्रणाली है जिसमें वस्तुओं और संसाधनों को व्यक्ति और समूह, सहयोगात्मक तरीके से साझा करते हैं ताकि भौतिक संपत्ति सेवाएं बन जाएं। यह अर्थव्यवस्था, लोगों और संगठनों को कम उपयोग किए गए संसाधनों से मुनाफा कमाने में सक्षम बनाती है।

वैश्विक साझाकरण अर्थव्यवस्था

Updated on:
10 Mar 2024, 12:54 PM IST
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