तिगलरपेट स्थित धर्मराय स्वामी मंदिर के परिसर से ऐतिहासिक बेंगलूरु करगा महोत्सव की शोभायात्रा निहारने के लिए शुक्रवार को देर रात श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। द्रौपदी की वेषभूषा में करगा ढो रहे व्यक्ति पर जगह-जगह फूल बरसाए गए। देर रात 1.30 बजे शुरू हुई शोभायात्रा का शनिवार सुबह 5.30 बजे समापन हुआ। प्रति वर्ष चैत्र माह की पुर्णिमा को महोत्सव का आयोजन किया जाता है। शहर के इस उत्सव की 350 वर्षों की परंपरा सतत रूप से चल रही है।
बेंगलूरु. तिगलरपेट स्थित धर्मराय स्वामी मंदिर के परिसर से ऐतिहासिक बेंगलूरु करगा महोत्सव की शोभायात्रा निहारने के लिए शुक्रवार को देर रात श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। द्रौपदी की वेषभूषा में करगा ढो रहे व्यक्ति पर जगह-जगह फूल बरसाए गए। देर रात 1.30 बजे शुरू हुई शोभायात्रा का शनिवार सुबह 5.30 बजे समापन हुआ। प्रति वर्ष चैत्र माह की पुर्णिमा को महोत्सव का आयोजन किया जाता है। शहर के इस उत्सव की 350 वर्षों की परंपरा सतत रूप से चल रही है।
इस महोत्सव को धर्मरायस्वामी शक्ति उत्सव भी कहा जाता है। अर्जुन तथा द्रौपदी की प्रतिमूर्तियों की शोभायात्रा निकाली जाती है। इसके अलावा श्रद्धालु कृष्ण, कुंती देवी, धर्मराज, भीम, नकुल सहदेव तथा अभिमन्यु की कांस्य मूर्तियों को सिर पर ढोते हैं। चंद्रमा के आसमान के बीचो-बीच पहुंचने पर रथयात्रा का आगाज होता है।
रथ यात्रा निर्धारित मार्ग पर चली। तिगलरपेटे, नगरथपेट, सिद्धप्पा लेन, भैरवेश्वर मंदिर, कब्बनपेट, राम मंदिर, आंजनेय स्वामी मंदिर, मक्कल बसवण्णा स्ट्रीट, गाणीगरपेट चन्नरायस्वामी मंदिर, चामुंडेश्वरी मंदिर ऐवेन्यू रोड, दोडड्पेटे होकर केआर मार्केट कोटे आंजनेया स्वामी मंदिर परिसर पहुंची।
उसके पश्चात कॉटनपेट के मस्तान साहेब दरगाह पहुंची। बाद में बलेपेट, हलेगरडी, एससी रोड के अण्णायम्मा मंदिर होकर शोभायात्रा कुंबारपेट, गोल्लरपेट, किलारी रोड तिगलरपेट होते हुए पुन: सूर्योदय से पहले धर्मरायस्वामी मंदिर के परिसर में पहुंची।
आकर्षण बरकरार
आधुनिकता की होड़ के बीच आज भी बेंगलूरु करगा महोत्सव का आकर्षण बरकरार है। महोत्सव देखने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा केरल राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। इसके उपलक्ष्य में धर्मराय स्वामी के मंदिर में गत 9 दिनों से विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए। शहर के 9 विभिन्न स्थानों पर करगा जलकुंड की पूजा जैसे अनुष्ठान विधि-विधान से किए गए। इस बार मधु नामक व्यक्ति ने करगा ढोया। करगा ढोने वाले व्यक्ति को उपवास के साथ कई नियमों का पालन करना पड़ता है। इस व्यक्ति को द्रौपदी के रूप में पीले रंग की साड़ी तथा सुहागन जैसे आभूषण पहनाए जाते हंै।
शोभायात्रा के साथ नंगी तलवारें लेकर चलने वालों को वीरकुमार कहा जाता है। करगा महोत्सव के निर्धारित मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। केआर मार्केट एवेन्यू रोड पर वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया था। कॉटनपेट मेन रोड में वाइट टॉपिंग का कार्य चलने के कारण इस बार करगा महोत्सव कॉटनपेट मेन रोड पर नहीं पहुंचा।