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देर रात तक कवियों के गीतों में बरसी चांदनी

प्रोग्रेसिव राइटर क्लब की ओर से गीत-चांदनी कार्यक्रम आयोजित किया गया

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Oct 17, 2024
कवि ज्ञान प्रकाश 'आकुल' को तारा प्रकाश जोशी स्मृति सम्मान से नवाजते विधायक गोपाल शर्मा और शायर लोकेश कुमार सिंह साहिल

जयपुर। शरद पूर्णिमा की रात बादलों की ओट से चांद की शीतल फुहार काव्य धारा से मिली तो सृजन की अविरल धारा बह निकली। मौका रहा, प्रोग्रेसिव राइटर क्लब की ओर से अजमेर रोड डीसीएम स्थित एक होटल में आयोजित गीत-चांदनी और तारा प्रकाश जोशी सम्मान समारोह का। इस मौके पर देश के जाने-माने कवियों ने देर रात तक काव्य पाठ के जरिए श्रोताओं को आनंदित किया।

कार्यक्रम में गाजियाबाद के कवि बृजेश भट्ट ने 'छिल-छिल काढ़े गए पांव का निकला…,' रचना से श्रोताओं को रस की धारा में डूबो दिया। लक्ष्मीपुर खीरी के कवि ज्ञान प्रकाश अकाल ने 'हम किसी बहरे समय में बांसुरी की तान जैसे, हम किसी बंजर धरा पर उग रहे थे धान जैसे…,' कविता सुनाकर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। दौसा की सपना सोनी ने 'मेरे मन की धारा पर मधुर भाव से…,' और इति शिवहरे ने 'कुंडली तो मिल गई है मन नहीं मिलता…,' कविता से श्रोताओं की दाद पाई।

चूरू के कवि बनवारी लाल खामोश ने जोशीले अंदाज में अपनी कविता 'अपने आंगन कब आया कोई त्यौहार…,' और नागौर के धनराज दाधीच ने 'बंटवारे को कर लिया कुछ ऐसे आसन हमने…,' से कार्यक्रम को रोशन किया। चित्तौड़गढ़ के कवि रमेश शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन भी किया और 'पत्ते झड़ने लगे बूढ़ा बरगद हुआ…', रचना भी पेश की।

इस अवसर पर विधायक गोपाल शर्मा, राधा मोहन चतुर्वेदी और आरएएस अधिकारी पंकज ओझा ने लखीमपुर खीरी के ज्ञान प्रकाश 'आकुल' को तारा प्रकाश जोशी सम्मान से सम्मानित किया। गीत चांदनी के संस्थापक विशम्भर मोदी का प्रोग्रेसिव राइटर क्लब की ओर से शायर और कवि लोकेश कुमार साहिल और संस्था पदाधिकारी ने सम्मान किया।

Published on:
17 Oct 2024 10:44 am
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