हारे का सहारा लखदातार बाबा ने लक्खी मेले में घाटे की गर्त में डूब रहे रोडवेज की झोली भर दी है। खाटूश्याम जी मेले के दौरान राजस्थान रोडवेज ने दो करोड़ 20 लाख रुपए का राजस्व कमाया, जो पिछले साल की तुलना में 35 लाख रुपए अधिक है। मेले के लिए रोडवेज की ओर से […]
हारे का सहारा लखदातार बाबा ने लक्खी मेले में घाटे की गर्त में डूब रहे रोडवेज की झोली भर दी है। खाटूश्याम जी मेले के दौरान राजस्थान रोडवेज ने दो करोड़ 20 लाख रुपए का राजस्व कमाया, जो पिछले साल की तुलना में 35 लाख रुपए अधिक है। मेले के लिए रोडवेज की ओर से करीब तीन सौ पिचहत्तर गाडियां चलाई। जिन्होंने चार लाख 27 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया। दो चरणों में लगे मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को हुए अतिरिक्त बस सेवाएं चलाईं। मेले के दौरान सबसे अधिक यात्री भार दिल्ली, कोटपूतली, जयपुर, सीकर, झुंझुनू, चूरू मार्ग पर भीड़ रही। रोडवेज ने पिछले वर्ष मेले के दौरान एक करोड़ 85 लाख रुपए का राजस्व कमाया था।
ये डिपो रहे टॉप
डिपो राजस्व आय
कोटपूतली- 1618238
झुंझुनूं-1141948
विद्याधर नगर-1146242
श्रीमाधोपुर-1347246
सीकर- 6218599
चूरू-706749
बीकानेर-936618
नागौर-668579
गंगानगर-777199
वैशाली नगर-646695
(राशि रुपए में)
इन कारणों से हुआ फायदा
रोडवेज डिपो की ओर से बसें चलाई गई। मेले के दौरान यात्री भार के अनुसार अतिरिक्त बस चलाने के कारण यात्रियों को फायदा रहा। सीकर डिपो ने मेले में रोडवेज संचालन और मार्ग तय करने का जिम्मा संभाला। रोडवेज की ओर से खाटूश्यामजी में मेला ग्राउंड के पास डिपो तक बस चलाई गई। वहीं आने व जाने के अलग-अलग रूट तय किए। इससे रोडवेज बस जाम नहीं फंसी और यात्रियों का रुझान रोडवेज की ओर से बढ़ा। मेले के दोरान पहली बार रोडवेज ने रींगस से खाटूश्यामजी के बीच शटल सेवा चलाई। इसके अलावा डिपो की ओर से दिल्ली, जयपुर, रींगस, सीकर स्टैंड पर अतिरिक्त कर्मचारी लगाए। इसके कारण यात्री सीधे खाटूश्यामजी पहुंचे और आसानी से दर्शन लाभ लिया।
इनका कहना है
अंचल का सबसे बड़ा लक्खी मेला होने के कारण रोडवेज कार्मिकों ने सीमित संसाधन होते हुए बेहतर तरीके से प्लानिंग की। इससे राजस्व में बढोतरी हुई। आगामी समय में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए इस रूट सहित अन्य मार्गों पर अधिक बस सेवाएं बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
दीपक कुमावत, मुख्य प्रबंधक रोडवेज, सीकर आगार