8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

National Youth Day 2026 : विवेकानंद नाम कैसे पड़ा? क्या है ये रोचक कहानी, इसका राजस्थान से क्या है कनेक्शन?

National Youth Day 2026 : पूरे देश में आज 12 जनवरी को युवा दिवस मनाया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी हुआ था। उन्हीं की याद में युवा दिवस मनाया जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि नरेंद्रनाथ को स्वामी विवेकानंद किसने बनाया था? साथ ही राजस्थान के कई अन्य राज घरानों से उनका गहरा संबंध था, जानें।

2 min read
Google source verification
National Youth Day How did Swami Vivekananda get his name What is this interesting story and what is its connection to Rajasthan

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वामी विवेकानंद जयंती व राष्ट्रीय युवा दिवस पर शुभकामनाएं दी। फोटो पत्रिका

National Youth Day 2026 : पूरे देश में आज 12 जनवरी को युवा दिवस मनाया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में एक कुलीन कायस्थ परिवार में हुआ था। उन्हीं की याद में युवा दिवस मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और मां का नाम भुवनेश्वरी देवी था। बचपन में सब उन्हें नरेंद्रनाथ दत्त के नाम से पुकारते थे। वैसे विवेकानंद को पांच नाम से जाना जाता था। नरेंद्रनाथ दत्त, कमलेश, सच्चिदानंद, विविदिशानंद और विवेकानंद। नरेंद्रनाथ से विवेकानंद नाम रखने की एक बेहद अनूठी कहानी है। यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस नाम के पीछे राजस्थान के एक राजा का हाथ था।

खेतड़ी के राजा ने दिया था विवेकानंद नाम

मामला तब का है कि जब स्वामी विवेकानंद शिकागो धर्म सम्मेलन में शामिल होने के लिए अमेरिका जाना चाहते थे। उसी दौरान उन्हें राजस्थान के खेतड़ी आना पड़ा। उस वक्त उनका नाम विवेकानंद नहीं था। तब खेतड़ी के राजा अजीत सिंह ने उनको विवेकानंद नाम दिया था। जिसे स्वामी जी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही विवेकानंद की पहचान उनकी भगवा पगड़ी, कमरबंध व अंगरखा उसे भी खेतड़ी के राजा अजीत सिंह ने ही स्वामीजी को भेंट किया था।

खेतड़ी राज परिवार ने की थी अमेरिका जाने की व्यवस्था

खेतड़ी राज परिवार ने ही शिकागो धर्म सम्मेलन में जाने के लिए 31 मई 1893 को ओरियंट कंपनी के पेनिनशूला जहाज में सफर के लिए स्वामी विवेकानंद को फर्स्ट क्लास का टिकट खरीदकर दिया था। यहां तक की अमेरिका से वापसी पर खेतड़ी में विवेकानंद का ऐतिहासिक स्वागत किया गया था। जयपुर स्थित खेतड़ी हाउस में पहली बार स्वामी विवेकानंद की तस्वीर खींची गई थी, जो आज दुनिया में उनकी पहचान के रूप में सबके सामने है।

राजस्थान की कई और रियासतों से भी था स्वामी विवेकानंद का संबंध

बताया जाता है कि राजस्थान से स्वामी विवेकानंद का गहरा संबंध था। खेतड़ी के अलावा भी राजस्थान की कई और रियासतें भी स्वामी विवेकानंद के चरित्र, अध्यात्म और उनके धर्म शास्त्रार्थ से प्रभावित थी। अलवर, सीकर, खाटू और जयपुर में प्रवास के दौरान राजा और उनसे जुड़े दरबार के लोग स्वामी विवेकानंद से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाए थे।

मूर्ति पूजा से जुड़े एक प्रसंग पर अलवर के राजा मंगल सिंह और विवेकानंद के बीच चर्चा हुई। इस मुद्दे पर अलवर के राजा स्वामी विवेकानंद के जवाब से इतना प्रभावित हुए कि उनके मुरीद हो गए। बताया जाता है कि अपने राजस्थान प्रवास के दौरान जयपुर दरबार के सेनापति ठाकुर हरि सिंह लाडखानी के खाटू हाउस पर स्वामी विवेकानंद का रुकना हुआ था। रामनिवास बाग में स्वामी विवेकानंद ने एक व्याख्यान को सुनकर हरि सिंह और जयपुर रियासत के प्रधान संसार चंद्र सेन ने उन्हें गुरु मान लिया था। जयपुर के बाद स्वामी विवेकानंद ने सीकर जिले में जीणमाता के दर्शन किए और सीकर राजा माधव सिंह के मेहमान रहे थे। वे राजस्थान में 13 दिसंबर 1897 को अपने दूसरे दौर की यात्रा में जयपुर आए थे।

राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाते हैं स्वामी विवेकानंद की जयंती

देश में हर साल स्वामी विवेकानंद की जयंती के दिन यानी 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। वर्ष 1984 से स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाए जाने लगा था।

राजस्थान से जुड़ी हर ताज़ा खबर, सीधे आपके WhatsApp पर
जुड़ें अभी
: https://bit.ly/4bg81fl