Rajasthan News : वैसे तो समूचे देश एवं प्रदेश के लिए गौरव की बात है लेकिन गंगानगर में इसका जश्न कुछ ही ज्यादा है। श्रीगंगानगर के लाडले उदय सहारण ने क्रिकेट में धमाल मचा दिया।
Rajasthan News : वैसे तो समूचे देश एवं प्रदेश के लिए गौरव की बात है लेकिन गंगानगर में इसका जश्न कुछ ही ज्यादा है। श्रीगंगानगर के लाडले उदय सहारण ने क्रिकेट में धमाल मचा दिया। यह उदय की संयम से भरी साहसिक पारी का ही कमाल था कि न केवल भारतीय युवा टीम वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाने में कामयाब हुई बल्कि उदय मैन ऑफ द मैच का खिताब जीतने में भी सफल रहे।
अंडर-19 विश्व कप सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को दो विकेट से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। टीम कप्तान उदय सहारण जिस समय बल्लेबाजी करने आए तब टीम के हालात अच्छे नहीं थे। टीम एक-एक रन के लिए संघर्ष कर रही थी। 32 रन पर चार विकेट गिर जाने के बावजूद उदय एवं सचिन ने दबाव झेला और सूझबूझ भरी पारी खेलकर अफ्रीका के जबडे़ से जीत छीन ली। उदय टीम को जीत की दहलीज तक लेकर गए लेकिन बदकिस्मती रन आउट हो गए। वो आउट हुए तब स्कोर बराबर हो चुका था। उदय ने धैर्य के साथ टिककर बल्लेबाजी की। इसका अंदाजा उनकी बल्लेबाजी से भी लगाया जा सकता था। उन्होंने 124 गेंद खेलकर 81 रन की पारी में केवल छह चौके लगाए। उदय अब तक विश्व कप में सर्वा धिक 389 रन बना चुके हैं। विदित रहे कि पिछले अंडर 19 में उन्हें स्टेंडबाई में रखा गया था जबकि इस बार वो टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
अंडर- 19 टीम इण्डिया के कप्तान श्रीगंगानगर के उदय सहारण की ओर से धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए भारत को फाइनल तक पहुंचाने पर उनके परिवार व दोस्तों सहित श्रीगंगानगर के लोगों में खुशी का माहौल है। एक शादी समारोह में शामिल होने गए उनके पिता संजीव सहारण की खुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं है। उनकी मां भी अपने बेटे की बल्लेबाजी देखकर व टीम को फाइनल तक पहुंचाने पर बेहद खुश दिखाई दी।
पत्रिका ने उनके पिता संजीव सहारण से बात की तो वे काफी खुश थे। उन्होंने कहा कि टीम को बेटे ने फाइनल तक पहुंचाया है, इसकी खुशी के लिए उनको पास कोई शब्द नहीं है। मेरे बेटे ने मेरा सपना पूरा किया है। जब वह गया था, तो कहकर गया था कि कप अपना ही होगा। हम उस जगह पहुंच रहे हैं, जहां जाना था। पिता ने जाते समय उदय सहारण को कहा था कि वह अपने हिसाब से ही खेले और दबाव में नहीं आए। उनको विश्वास था कि जब वह अकेला जम जाता है, तो फिर पीछे नहीं हटता।
मैच जीतने के बाद उदय ने कमेंटेटर से बातचीत करते हुए कहा कि उनको विश्वास था कि अगर खड़े रहे तो मैच आखिर तक जाएगा। पापा भी धीरे-धीरे ही खेलते थे और मैच को आखिर तक ले जाते थे। मैंने भी यही सोचा कि खड़ा रह गया तो बड़े शॉट तो बाद में भी खेल सकता हूं। वैसे मैच के दौरान उदय अपने साथी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाते भी सुने गए।
उदय के कोच उनके पिता डाॅ. संजीव सहारण हैं, जो कि ए श्रेणी के क्रिकेट कोच भी हैं। डाॅ.सहारण ने बताया कि उनका सपना भी बड़ा क्रिकेटर बनने का था लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। आयुर्वेद में डाॅक्टर की पढ़ाई की। खुद का सपना बेटे में देखा और उसको रोजाना दस से बारह घंटे तक अभ्यास करवाया। सहारण ने बताया कि उन्होंने बेटे को कभी किसी खिलाड़ी से कॉपी करने का नहीं सिखाया।