
श्रीगंगानगर.नगर परिषद में शामिल हो चुकी ग्राम पंचायत तीन ई छोटी का मामला प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता दिख रहा है। ग्राम पंचायत के निर्माण और वित्तीय रिकॉर्ड लगभग छह महीनों से उपलब्ध नहीं हैं। 2 करोड़ 13 लाख 81 हजार 983 रुपए के भुगतान की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई। नियमानुसार चार्ज हस्तांतरण के साथ रिकॉर्ड पंचायत समिति व जिला परिषद को सौंपा जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी कमलेश स्वामी, जो वर्तमान में मिर्जेवाला ग्राम पंचायत में पदस्थ हैं, पर रिकॉर्ड जानबूझकर जमा नहीं कराने के आरोप हैं।
प्रकरण में पूर्व विकास अधिकारी व पंचायत समिति ने जांच कमेटी गठित की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि चार्ज समय पर हस्तांतरित नहीं हुआ और बेहद कम अवधि तीन माह में प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृतियों के साथ 2 करोड़ 13 लाख 81 हजार 983 रुपए का भुगतान किया गया, जो संदेहजनक है। इस आधार पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिराम चौहान की अगुवाई में नई जांच कमेटी बनाई गई।
बीडीओ भंवर लाल स्वामी ने बताया कि रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण जांच बार-बार अटकी। करीब एक माह पूर्व कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर धारा 16 सीसी के तहत चार्जशीट थमाई गई। इसके बावजूद रिकॉर्ड नहीं मिला और ना किसी गिरफ्तारी या निलंबन की कार्रवाई हुई। जिला परिषद के सीईओ गिरधर ने जांच कमेटी को सात दिन का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।
जिला परिषद के अनुसार अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिराम चौहान,वरिष्ठ लेखाधिकारी विनीत कुमार,अधिशासी अभियंता रामेश्वर लाल बेनीवाल,सहायक सांख्यिकी अधिकारी दिलीप जाखड़ व अतिरिक्त विकास अधिकारी किशन लाल शामिल हैं।
प्रशासक व ग्राम पंचायत तीन ई छोटी तथा पंचायत समिति के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जांच दल को पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
-गिरधर,सीईओ,जिला परिषद,श्रीगंगानगर
Published on:
06 Feb 2026 01:08 pm
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