
श्रीगंगानगर.
राजकीय जिला चिकित्सालय में व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो रहा है। इस संबंध में जब जिला कलक्टर के आदेश पर गुरुवार को एसडीएम यशपाल आहुजा ने जब औचक निरीक्षण किया तो वहां खलबली मच गई। उन्होंने चिकित्सालय के अधिकांश वार्डों का निरीक्षण किया तो वहां 25 कूलर, 10 एसी और 11 वाटर कूलर खराब मिले। इसकी रिपोर्ट तैयार कर जिला कलक्टर के सुपुर्द की गई है। राजस्थान पत्रिका के गुरुवार के अंक में प्रकाशित समाचार 'सुधरी नहीं व्यवस्था, कूलर-पंखें भी बीमार' से जिला प्रशासन में हरकत में आया और एसडीएम को तत्काल चिकित्सालय का निरीक्षण करने के लिए भेज दिया।
एसडीएम ने कई वार्डों में जाकर जब कूलर चैक किए तो उनसे ठंडी हवा नहीं आ रही थी, कई कूलर से पम्प गायब थे तो कईयों की घास की पट्टियां भी उखड़ी हुई मिली। मेल सर्जिकल वार्ड में एक पंखा खराब मिला। चिकित्सालय कैम्पस में दस एसी खराब हालात में मिले। ऐसे में रोगियों को अधिक परेशानी हो रही थी।
स्टोर में धूल फांक रहे दान के 54 पंखे
एसडीएम ने बताया कि जब चिकित्सालय के उप नियंत्रक से दान में दिए 54 पंखों के इस्तेमाल के संबंध में सवाल किया गए तो उनका जवाब था कि आधे लग चुके हैं और इतने ही लगाए जा रहे हैं। उप नियंत्रक की बात का विश्वास कर चौबीस घंटे पहले रिपोर्ट कलक्टर को सौंपी थी, लेकिन गुरुवार को जब इन 54 पंखों का हिसाब किताब देखा तो जहां पंखें खराब थे या नहीं थे, वहां लगने की बजाय स्टोर रूम में बंद ताले में नजर आए।
दान दिए पंखों को लगाने के लिए कोई अस्पताल प्रशासन गंभीर नजर नहीं आया। इसकी रिपोर्ट कलक्टर को दी गई है। एसडीएम ने बताया कि चिकित्सालय प्रशासन ने कूलर, पंखों और एसी को दुरस्त करने के लिए डेढ़ लाख रुपए का बजट खर्च करने का दावा किया है लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं मिला।
रोगियों की बजाय स्टाफ को सुविधा
एसडीएम ने बताया कि जब पीने के पानी के लिए वहां चैकिंग की तो वहां अजीब स्थिति नजर आई। रोगियों और उनके परिजनों के लिए लगाए गए बारह में से एक ही वाटर कूलर चालू हालत में नजर आया। यह वाटर कूलर भी एक समाजेसवी संस्थान की ओर से लगा हुआ था। अन्य तीन वाटर कूलरों में ठंडा पानी था, लेकिन ये वाटर कूलर रोगियों और उनके परिजनों की बजाय स्टाफ के लिए था। स्टाफ के लिए यह सुविधा अच्छी थी, लेकिन रोगियों के लिए नहीं। स्टाफ के तीनों वाटर कूलर भी कक्ष के अंदर ऐसे स्थान पर स्थापित किए हुए थे कि वहां रोगी या उनके परिजन जा नहीं सकते। यही स्थिति कूलरों और पंखों की थी। स्टाफ के लिए लगे कूलर चकाचक थे और अच्छी कूलिंग कर रहे थे।