
पशुपालन विभाग ने जिला कलक्टर को पेश की रिपोर्ट
श्रीगंगानगर. मिर्जेवाला रोड पर नंदीशाला में मारे गए बारह पशुओ के मामले की विचाराधीन जांच के दौरान पशुपालन विभाग ने अपनी रिपोर्ट बनाकर जिला कलक्टर को सुपुर्द की है। पशुपालन विभाग को इस नंदीशाला के करीब साढ़े छह सौ पशुओं को अन्यत्र गोशालाओं में भिजवाने के लिए अधिकृत किया गया था।
इस संबंध में शुक्रवार को पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डा.मुखराम कड़वासरा ने जिले की 63 गोशालाओं में 450 पशुओं के रखने की सिफारिश की है। कड़वासरा ने बनाई गई गोशालाओं की सूची में प्रत्येक गोशाला को दस से पन्द्रह पशु रखने के लिए कहा गया है। पशुपालन विभाग ने संबंधित गोशालाओं के संचालकों से बातकर उनके यहां पशुओं के रखने के लिए सहमति व्यक्त की है।
कड़वासरा की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि सुखाडिय़ा सर्किल श्रीगोशाला ने 15 पशु, पदमपुर रोड कल्याण भूमि गो सेवा सदन ने सिर्फ 10 पशु, 11 पी पतरोड़ा में 10 पशु, श्रीकरणपुर की दो गोशालाओं में 25, 2 डीडी में 25, बींझबायला में 10, फकीरवाली में 20, गजसिंहपुर में 20, घमूड़वाली में 10, पदमपुर 25, भादवांवाला में 40, बुढाजोहड़ डाबला, कीकरवाली, लक्खाहाकम में पांच-पांच, रायसिंहनगर में 10, समेजा कोठी में 20 के अलावा ठंडी, डूंगरसिंहपुरा, कालवासिया, मन्नीवाली, सादुलशहर, ताखरांवाली, फतूही, गोविन्दपुरा 18 जीजी, मिर्जेवाला, भोपालपुरा, उदयपुर गोदारान, श्रीविजयनगर और रोहिड़ावाली गोशालाओं में पशुओं केा भिजवाने की व्यवस्था की जाएगी।
लेखाकार डूडी के अलावा जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई
इधर, जांच अधिकारी एसडीएम सौरभ स्वामी ने नंदीशाला प्रभारी और नगर परिषद के लेखाकार मदनलाल डूडी को निलम्बित किए जाने के अलावा अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के संकेत दिए है। जांच की प्रक्रिया में चारा आपूर्ति का रिकार्ड को खंगाला जा रहा है।
इस नंदीशाला में नगर परिषद प्रशासन ने जनसहयोग के अलावा कई क्विंटल रोजाना हरा चारा और तूड़ी की खरीद कर भिजवाने की व्यवस्था की थी। जांच टीम का कहना है कि डूडी ने अपने परिचित को ही चारे की आपूर्ति का ठेका दे दिया था।
इस मामले में परिषद कार्मिक की भूमिका की जांच की जा रही है। चारे में अनियमितता बरतने का मामला करीब छह माह पहले भी उठा था। इसकी शिकायत जब उपसभापति अजय दावड़ा और अन्य पार्षदों ने की थी तब तत्कालीन आयुक्त सुनीता चौधरी ने इस मामले में लीपापोती कर दी थी। तब यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।