माध्यमिक शिक्षा के 448 स्कूलों के संस्थान प्रधान हुए शामिल, जिला मुख्यालय पर दो दिवसीय संस्था प्रधानों की वाकपीठ
श्रीगंगानगर.
प्रारंभिक शैक्षिक स्तर पूर्ण करने के बाद माध्यमिक शिक्षा में प्रवेश लेने के साथ ही विद्यार्थी में समय के साथ व्यापक परिवर्तन आने लगते हैं। इन्हीं परिवर्तनों में विद्यार्थी को ढाल कर जीवन में निरंतर आगे बढऩे के अवसर प्रदान करने में संस्था प्रधानों की सकारात्मक सोच महत्पूर्ण भूमिका निभाती है। इसी सकारात्मक सोच के प्रभावी क्रियान्वयन का आधार बन रही है वाकपीठ संगोष्ठी। श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को दो दिवसीय वाकपीठ संगोष्ठी में विद्यालयों के बुनियादी ढांचे में विकास,शैक्षिक संरचना को सुढृढ़ करने,तकनीकी नवाचार को अपनाने और गुणवत्ता युक्त शिक्षा का सर्वग्राही बनाने में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन कर
रही है।
रैंकिंग में हुआ सुधार
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) तेजा सिंह ने कहा कि जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है और जिले की रैकिंग में सुधार हुआ है। साथ ही आधार कार्ड से लिंक करवाने में जिला राज्य में प्रथम स्थान पर रहा है। उन्होंने इसी गति को बनाए रखने का आह्वान संस्था प्रधानों से कहा। वाकपीठ संगोष्ठी के अध्यक्ष राजवीर सिंह गिल थे। संगोष्ठी में अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी मनोहर लाल चावला व अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार वधवा ने आरटीआई के बारे में बताया।
संगोष्ठी सचिव और प्रधानाचार्य सुनील भाटिया ने बताया कि प्रधानाचार्य अरविंद्र सिंह ने अंग्रेजी भाषा का प्रभावी संबोधन,कंवरपुरा प्रधानाचार्य रिंपा तलवार ने विद्यालय में पर्यावरण व स्वास्थ्य में संस्था प्रधान की भूमिका, 31 आरबी स्कूल के प्रधानाचार्य श्याम लाल कुक्कड़ ने मिड-डे मील की गुणवत्ता व रिकॉर्ड संधारण, जयपुर से आए गणपतराम ने एसआईक्यूई के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
इन पर हुई चर्चा, बदली सोच-बोर्ड
परीक्षा का विश्लेषण और उन्नयन के उपाय-गुणवत्तायुक्त शिक्षा के रिप्रेक्ष्य में संस्था प्रधान की भूमिका।
-सूचना तकनीकी प्रौद्योगिकी का विद्यालय में समुचित उपयोग।
-आदर्श विद्यालय और उसकी परिकल्पना।
-विषय और विद्यालय क्रमोन्नति पर कक्षाओं का पृथकीकरण ।
- विद्यालय में नैतिक शिक्षा की आवश्यकता।
-स्वच्छ भारत अभियान में विद्यालय की भूमिका।
-विद्यालय कार्यों में कंप्यूटर तकनीकी योगदान।