विश्व शौचालय दिवस पर विशेष: जिला परिषद और नगर परिषद में शौचालय की सुविधा बनी दुविधा
श्रीगंगानगर. एक ओर सरकार आमजन और सरकारी महकमे में कार्यरत स्टाफ को शौचालय और मूत्रालय की सुविधा देने में बजट खर्च करने में परहेज नहीं करती लेकिन इसकी सार संभाल के लिए जिम्मेदार कन्नी काटने लगे हैं। नगर परिषद में लाखों रुपए खर्च कर वातानूकुलित शौचालय का निर्माण कराया तो जिला परिषद कैम्पस में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालय का निर्माण कर इस पर ताले लगा दिए गए। स्वच्छता के संबंध में पूरी दुनिया में 19 नवम्बर को विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता हैं, इसे देखते हुए पत्रिका टीम ने नगर परिषद और जिला परिषद कैम्पस में शौचालय सुविधा का जायजा लिया तो यह हकीकत सामने आई।
वातानुकूलित सुलभ शौचालय में अब पंखे भी नहीं
तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री विशेष् बजट से शहर में पांच जगह वातानुकूलित सुलभ शौचालयों का निर्माण कराया गया। इस पर पचास लाख रुपए औसतन प्रति शौचालय कुल मिलाकर ढाई करोड़ रुपए का बजट खर्च किया गया लेकिन नगर परिषद में संचालित इस शौचालय का एसी खराब पड़ा हैं। संवारने के लिए लगाए गए शीशे टूट चुके हैं। हाथ धोने के बाद हाथ सुखाने के लिए लगाई ड्रायर मशीन भी खराब हो चुकी है। परिंदों ने यहां डेरा जमा लिया हैं। ज्यादातर मूत्रालयों में क्लीनर दवा नहीं डाली जाती, इस कारण अंदर प्रवेश करते ही बदबू अधिक आने लगी है। पानी की किल्लत बनी है। हाथ धोने के लिए साबुन तक नहीं रखी जाती। इसी सुविधा केन्द्र पर नहाने के लिए व्यवस्था करने का दावा किया गया था लेकिन दोनों बाथरूम बंद है। गर्म पानी की व्यवस्था तक नहीं है।
इसलिए मनाया जाता है विश्व शौचालय दिवस
19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है। यह दिन मुख्य रूप से लोगों को वैश्विक स्वच्छता संकट से निपटने और सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 6 को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने के बारे में है, जो 2030 तक सभी के लिए स्वच्छता का वादा करता है। यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ के अनुसार वैश्विक आबादी के लगभग 60 प्रतिशत या लगभग 4.5 बिलियन लोगों के घर में शौचालय नहीं हैं या वे नहीं जानते कि शौचालय के कचरे का उचित तरीके से निपटान कैसे किया जाए।ऐसे लोगों को जागरूक करने के लिए यह दिवस मनाया जाता हैं।