-अब तो यहां आवारा पशुओं का जमावड़ा
श्रीगंगानगर.
राजकीय जिला चिकित्सालय का मुख्य पार्क अपनी बेबसी की कहानी खुद बयां कर रहा है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि इस पार्क में हरियाली समाप्त होने के कगार पर है।
यह पार्क कचरे के ढेर और डिस्पोजल का संग्रहण केन्द्र बन चुका है। अब तो यहां आवारा पशुओं का जमावड़ा रहने लगा है। चिकित्सालय में औसतन चार से पांच सौ रोगी उपचाराधीन है, इस रोगियों के परिजन और परिचित इस पार्क में आकर खाना खाते हैं। लेकिन यह पार्क अब बैठने लायक नहीं बचा। हालांकि चिकित्सालय की पीएमओ ने इस पार्क को सुधारने के लिए कई बार समाजसेवी संगठनों को गोद देने की घोषणा की लेकिन हर बार समाजसेवी संस्थाएं महज दो या तीन महीने के बाद इस पार्क का रखरखाव करने में नाकाम रही।
रही सही कसर चिकित्सालय प्रशासन ने गंदे पानी की निकासी इस पार्क में करके पूरी कर दी। पेड़ों से सुगंध की जगह अब गंदे पानी की बदबू आती है। ऐसे में वहां लोगों की आवाजाही अब धीरे-धीरे कम हो रही है। चिकित्सालय के अंदर वार्ड और ओपीडी में रोगियों की अधिक भीड़ के कारण उमस भरी गर्मी रहती है, ऐसे में रोगियों के परिजन इस पार्क में सुकून की उम्मीद में आते हैं परन्तु सड़ांध का पता चलते पर मन मसोस कर लौट जाते हैं।
सुलभ कॉम्पलैक्स ने बिगाड़ी चाल
इस पार्क में अब तक दो बार सुलभ कॉम्पलैक्स बन चुके हैं। करीब ढाई दशक पहले पार्क के एक साइड में शौचालय और मूत्रालय बनाए गए लेकिन सार-संभाल नहीं होने से वहां यह सुविधा लगभग समाप्त कर दी गई। ऐसे में पिछले चार साल से नया सुलभ कॉम्पलैक्स बना दिया गया है। इस कॉम्पलैक्स का निर्माण भी पार्क की भूमि में किया गया है।
यहां युवाओं के श्रमदान से बदली तस्वीर
चिकित्सालय परिसर में एक और छोटा पार्क भी है, इस पार्क की हालत भी कुछ ठीक नहीं थी लेकिन पिछले दो सप्ताह से आसपास कॉलोनियों के बीस युवाओं की टीम ने श्रमदान कर इस पार्क की काया पलट दी। इन युवाओं ने किसी संगठन या राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। युवाओं का कहना था कि उनको कोई नाम या लोकप्रियता हासिल करने की जरूरत नहीं है सिर्फ श्रमदान करना है। गुपचुप तरीके से आने वाले इन युवाओं ने इस छोटे पार्क की घास कटिंग, मलबे के ढेर और खरपतवार को साफ कर दिया है। लेकिन इस पार्क में अधिक पेड़ नहीं होने के कारण लोग वहां दुपहरी में जाने से परहेज करते हैं।