गौ माता के नाम पर सियासत करने वाले चुप
लालगढ़ जाटान. गांव में आवारा पशुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। पशुपालक गाय के बछड़ों को पालने की बजाए उसके सार संभाल के बोझ से बचने के लिए उन्हें गलियों में आवारा छोड़ देते हैं। जो भूख से तड़पते बिलखते पॉलीथिन व अन्य कचरा खा लेते हैं तथा बीमार होकर प्राण त्याग देते हैं। इस तरह मरे हुए पशु सार्वजनिक स्थानों पर कई दिनों तक मृत पड़े रहते हैं तथा वहां पर कुत्तों द्वारा उसे खा लिया जाता है। इस मृत पशुओं को जब तक कुत्तों द्वारा आधा तक नहीं खाया जाता तब तक उठवाने की कोई भी व्यक्ति आवश्यकता महसूस नहीं करता है गली बदलकर निकल जाते हैं।
कोई भी इस हिंदू समाज में इस घटना को अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते हैं जिससे वहां पर गंदगी तथा बदबू फैल रही है। आज लालगढ़ जाटान में कुछ ऐसा ही वाकया देखने को मिला। यहां 2 दिन से मृत पड़े बछड़े को कुत्तों द्वारा बुरी तरह नोच दिया गया था जिससे दुकानों के सामने बदबू आ रही थी। मेन बस स्टैंड के पास बछड़े को कुत्तों द्वारा नोच दिया गया परंतु किसी का उस ओर ध्यान नहीं गया। उठवाने के लिए पैसे देने के बावजूद भी दो दिन बाद उठाया गया।
सिर्फ उठाने वाले को ही दोष दिया जाता है कि आप इन को उठाकर नहीं ले जाते हैं धर्म के नाम पर तथा गौ माता के नाम पर सियासत करने वाले यहां पर चुप दिखाई दिए। हर जगह गौ रक्षा के नाम पर सियासत करने वाले मुद्दा बनने की उम्मीद करते रहते हैं ताकि किसी प्रकरण को मुद्दा बनाकर राजनीतिक रोटियां सेकी जा सके। और हर व्यक्ति गौ माता के नाम दान दे सकता है परंतु गौ माता की रक्षा करना वह उसकी सेवा कोई नहीं कर सकता सेवा अपने नाम के लिए ही है इस तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है तथा गौ माता को सिर्फ राजनितिक मुद्दा बना दिया गया है।