श्री गंगानगर

भामाशाह स्वास्थ्य योजना में गड़बड़ी का मामला, डोर टू डोर जाकर लिए जाएंगे मरीजों के बयान

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श्रीगंगानगर.

भामाशाह स्वास्थ्य योजना में भारी गड़बड़ी के मामले की जांच में अब तक कई रोगियों की सूची तैयार हो चुकी है। जिन्होंने राजकीय जिला चिकित्सालय में पंजीयन तो करवाया लेकिन ऑपरेशन प्राइवेट नर्सिंग होम से कराया था। जांच अधिकारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के उप निदेशक डॉ. संदीप अग्रवाल की अगुवाई में टीम ने राजकीय जिला चिकित्सालय में 4200 में से 2800 मरीजों के गायब होने की जांच के तहत एक सूची तैयार की है। इस सूची में उन रोगियों के संपर्क नम्बर के अलावा उनके पते भी अंकित किए है।

यह जांच दल अब इन मरीजों से डोर टू डोर जाकर यह जानने का प्रयास करेगा कि वे खुद अपनी मर्जी से चिकित्सालय से गए थे या फिर उनको किसी चिकित्सक या चिकित्साकर्मी के कहने पर प्राइवेट नर्सिंग होम में भिजवाया गया। इन रोगियों का जिन-जिन नर्सिंग होम में ऑपरेशन किया गया था, वहां की सूची भी बनाई गई है।

इन नर्सिंग होम संचालकों ने भामाशाह स्वास्थ्य योजना के माध्यम से नि:शुलक ऑपरेशन का दावा किया है जबकि दवाइयों और विभिन्न जांचों के नाम से रोगियों से कथित वसूली हुई है। जांच दल ने ऐसे नर्सिग होम से दस्तावेज भी खंगाले है।


ऑपरेशन की लंबी कतार बनी हथियार

अब तक जांच में यह पहलू सामने आया है कि राजकीय जिला चिकित्सालय में ऑपरेशन के लिए लंबी कतार होने के कारण रोगियों को यह भयभीत किया जाता है कि चिकित्सालय में समुचित सुविधा नहीं है। प्राइवेट नर्सिंग होम में भामाशाह योजना कार्डधारकों के लिए नि:शुल्क ऑपरेशन की व्यवस्था है। ऐसे में रोगियों को वहां भिजवाने का सिलसिला शुरू हो गया था।

लेकिन प्राइवेट नर्सिंग होम में नि:शुल्क सुविधा के बावजूद उनसे ब्लड जांच, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी जांच के अलावा दवाइयों की कथित वसूली भी की गई। जांच दल टीम में शामिल अधिकारियों की माने तो चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्साकर्मी ऐसे हैं जिन्होनें ऑपरेशन की वेटिंग लिस्ट का हवाला देते हुए इसे कमाई का हथियार बना लिया था। इस कारण पंजीकृत होने के बावजूद रोगी चिकित्सालय की बजाय प्राइवेट नर्सिंग होम में इतनी बड़ी संख्या में पहुंच गए।

Published on:
02 Aug 2018 08:23 pm