
श्रीगंगानगर। उम्मीदों को पंख लगी थी कि जिला मुख्यालय पर सरकारी मेडिकल कॉलेज का निर्माण और कृषि विश्वविद्यालय खुलेगी, इलाकेवासियों को यह आश्वासन भी दिया गया लेकिन धरातल पर दोनों मुददे महज सपना बनकर रह गए।
पांच साल का लंबा समय बीतने के बाद इस बार फिर से चुनावी जनसंपर्क में लगे प्रत्याशियों ने हर नुक्कड़ सभा में मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए अपना राग अलापा है।
कोई उम्मीदवार दावा करता है कि वह विधायक बनते ही इस अधूरे वायदे को पूरा करवा देगा तो कोई सरकार बनने के महज एक माह में यह मेडिकल कॉलेज का निर्माण करने का आश्वासन दे रहा है। यहां कि कृषि विश्वद्यिालय खुलने और पंजाब से नहरों के माध्यम से आ रहे दूषित पानी को साफ कराने के लिए वोट मांगे जा रहे है।
लेकिन गत पांच साल में चुनावी मुददे बनकर रह गए थे। बरसाती पानी निकासी कराने के लिए एसटीपी प्लांट और सीवर लाइन बिछाने का काम पांच साल बीतने के बावजूद पूरा नहीं हो पाया है। यहां कि जर्जर सडक़ें, गंदगी से अटे मुख्य नाले, क्षतिग्रस्त हो चुके डिवाइडर, अतिक्रमण की विषबेला से अब तक निजात नहीं मिल पाई है।
व्यापारी हनुमान गोयल का कहना है कि चुनाव में बड़े बड़े सपने दिखाए जाते है लेकिन हकीकत में एक भी डिमांड पूरी नहीं होती। वहीं ब्लॉक एरिया के अजय गौड़ का मानना है कि इलाका कृषि प्रधान होने के कारण कृषि विश्वविद्यालय की जरूरत है लेकिन कमजोर जनप्रतिनिधित्व के कारण सरकार से यह हक मांगा नहीं जा रहा है।
उधर, बी ब्लॉक निवासी भूपेन्द्र का मानना है कि मेडिकल कॉलेज बनाने के मुद्दे पर पिछले चुनाव में कामिनी जिन्दल विधायक भी चुनी गई, यहां तक कि विधानसभा क्षेत्र के 51 प्रतिशत मतदाताओं ने इस मुद्दे के कारण जिन्दल के पक्ष में वोटिंग की।