
श्रीगंगानगर.
क्षेत्र में अनेक किसान अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं। ये किसान फसल अवशेष जला रहे हैं, इससे नुकसान ही नुकसान है। रबी का सीजन पूरा होने के बाद किसान इन दिनों खरीफ की बुवाई में लगे हैं। गेहूं एवं जौ को जिन किसानों ने बो रखा था, उनमें से कइयों ने फसल अवशेष जलाने के लिए खेत में आग लगाई है।
देशी कपास बोने का काम पूरा हो चुका है, नरमा एवं बीटी कॉटन की बुवाई अंतिम चरण में है। अब ग्वार की बुवाई का काम शुरू होना है। खेत को खाली करने के लिए समय, श्रम एवं राशि बचाने के चक्कर में कुछ किसान आग लगा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध है। कृषि विभाग समय-समय पर अपनी गोष्ठियों आदि कार्यक्रम में इन्हें नहीं जलाने की सलाह देता है, होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया जाता है। इसके बावजूद काफी किसानों की लापरवाही जारी है। गेहूं एवं जौ को जिन किसानों ने बो रखा था, उनमें से कइयों ने फसल अवशेष जलाने के लिए खेत में आग लगाई है।
दिया जा रहा है अनुदान
कृषि विभाग के अनुसार तूड़ी बनाने वाली मशीन पर अनुदान दिया जा रहा है। इसके पीछे यही मंशा है कि किसान फसल अवशेष को नहीं जलाए और तूड़ी बनाए। ऐसा करना किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी है।
किसानों को सावधानी रखनी चाहिए। फसल अवशेष जलाने के काफी नुकसान हैं। इससे मिट्टी की आत्मा माने जाने वाला जैविक कार्बन जल कर नष्ट हो जाता है। भूमि की उर्वरा शक्ति समाप्त होती है। मिट्टी की जल धारणा क्षमता में कमी आती है, मित्र कीट मरते हैं'
डॉ. मिलिन्द सिंह, कृषि अनुसंधान अधिकारी
मां को मिला बेटे से मिलने का हक - https://goo.gl/DnH6Xr