श्री गंगानगर

एक हजार किसानों को आज तक नहीं मिली आजादी

पानी के लिए किसान आंदोलन करते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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Updated: 24 Jan 2018, 7:40 AM IST
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पानी के लिए किसान आंदोलन करते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

श्रीगंगानगर.

एक तरफ हम करीब सत्तर साल से आजादी का जश्न मनाते आ रहे हैं लेकिन यहां एक एेसा भी गांव है, जिसके करीब एक हजार किसानों को आज तक भी एक अंग्रेज अफसर की हठधर्मिता से आजादी नहीं मिल पाई है। यहां गांव के बीच से नहर निकल रही है लेकिन 80 साल से यहां के करीब एक हजार किसान पानी के लिए तरस रहे हैं। यही नहीं सत्तर साल से आंदोलन व मांग कर रहे किसानों को केवल आश्वासन तो मिले लेकिन पानी अभी भी नहीं मिल पाया है और ना ही जल्द उनको पानी मिलने की उम्मीद नजर आ रही है।

पदमपुर पंचायत समिति क्षेत्र के गांव जीवनदेसर के सरपंच गुरमीत सिंह, मलकीत सिंह किरोडीवाल एवं अन्य किसानों ने बताया कि करीब अस्सी साल पहले अंग्रेजों के जमाने में जब नहर बनाने का काम चल रहा था, तो वहां एक अंग्रेज अफसर को ग्रामीणों ने पेड़ की टहनी तोडऩे से रोक दिया। इसको लेकर वह इतना नाराज हुआ कि जीवनदेसर गांव के बीच से होकर नहर तो निकाल दी लेकिन वहां किसानों को सिंचाई के लिए नहर में मोघा नहीं छोड़ा। पानी के लिए किसान आंदोलन करते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

देश आजाद हुआ तो किसानों ने राहत की सांस ली कि अब तो उनको पानी मिल ही जाएगा लेकिन आजादी के बाद सरकारें आती रही और जातीं रही लेकिन किसानों को सत्तर साल में नहर का पानी नसीब नहीं हुआ। आज तक भी यहां किसान नहरी पानी के लिए अधिकारियों व मंत्रियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं लेकिन आश्वासन तो मिल रहे हैं लेकिन पानी नहीं मिल पा रहा है। मंगलवार को भी यहां के किसान जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता से मिले और उनको पानी दिलाए जाने की मांग रखी। इस दौरान सरपंच गुरमीत सिंह, मलकीत सिंह किरोडीवाल, तारासिंह किरोडीवाल, जोगेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, हरजीत सिंह, पालासिंह बोकरिया, चांदनराम जलधंरा, दुल्लाराम वार्ड पंच, मिल्खी सिंह आदि मौजूद थे।

टंकी पर चढ़े, पैदल यात्रा भी की लेकिन नहीं मिला पानी - किसानों ने बताया कि वे करीब सत्तर साल से वे नहरी पानी के लिए आंदोलन कर रहे हैं। मामले को लेकर वे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, जिला कलक्टर, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के यहां चक्कर लगाते रहे लेकिन उनको पानी नहीं मिल पाया। हर जगह केवल आश्वासन मिलते रहे लेकिन पानी नहीं मिल पाया। पहले कुओं से करते थे सिंचाई - किसानों ने बताया कि नहर आने से पहले व बाद में वे फसलों में सिंचाई कुओं के पानी से करते थे लेकिन धीरे-धीरे नहर के कारण कुओं का पानी खारा होता गया और कुएं बंद होते गए। खाने पानी के कारण उनकी जमीन खराब हो गई और कुछ बरानी जमीन है, जिसमें पानी के अभाव में फसल नहीं हो पाती।

नहर बनाने में पुरखों ने बहाया था पसीना

जब गांव में नहर का निर्माण कार्य चल रहा था तो गांव के लोगों ने गधों से नहर की खुदाई कर मिट्टी निकाली थी। उनके पुरखों ने नहर खुदाई के दौरान अपना काफी पसीना भी बहाया था लेकिन इसके बावजूद भी उनको पानी से वंचित रखा गया। चार बार हो चुका सर्वे - गांव में १६०९ एक भूमि पर सिंचाई के लिए पानी देने को जल संसाधन विभाग की ओर से चार बार सर्वे कराया जा चुका है लेकिन इसके बाद भी उनको पानी नहीं मिल पाया है। सर्वे तो हो गए लेकिन कोई कार्रवाई आज नहीं हो पाई है। सर्वे होने पर किसानों को लगा था कि उनको पानी मिलेगा लेकिन कुछ नहीं हो पाया।

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