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ग्राउंड रिपोर्ट: भारत-पाक बॉर्डर पर खेतों में फसल की जगह खारा पानी, करोड़ों की जमीन के खरीदार तक नहीं

श्रीगंगानगर में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे गांवों में सेम और जलभराव से खेती चौपट हो रही है। करीब 200 मुरब्बा कृषि भूमि प्रभावित है। इनमें लगभग 180 मुरब्बा में खेती पूरी तरह बंद हो चुकी है।
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श्री गंगानगर

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Arvind Rao

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युगलेश शर्मा

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Updated: 1 Nov 2026, 10:26 AM IST

india pakistan border saline water ruins crops

भारत-पाक बॉर्डर पर ऐसा क्या हुआ कि करोड़ों की उपजाऊ जमीन बंजर बन गई (पत्रिका फोटो)

-युगलेश शर्मा

श्रीगंगानगर: जहां कभी सरसों, गेहूं, चना और ग्वार की फसलें लहलहाती थीं, वहां अब खेतों में पानी भरा है और जमीन पर नमक की सफेद परत जम गई है। कई जगह खेत दलदल में तब्दील हो चुके हैं। भारत-पाक सीमा से सटे रायसिंहनगर और अनूपगढ़ उपखंड के कई गांवों का यही वीरान मंजर है। ग्रामीण इसका कारण पाकिस्तान की सादकी नहर से निकलने वाली हाकड़ा ब्रांच से पानी का रिसाव मानते हैं।

उनका कहना है कि करीब दो फीट खुदाई करने पर ही खारा पानी निकल आता है। सेम के बढ़ते जलभराव और लवणता से खेती चौपट हो रही है। कभी करोड़ों रुपए की कीमत वाली जमीन के लिए अब खरीदार नहीं मिल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पेयजल और खारे पानी के कारण दांतों में पीलापन, जोड़ों में दर्द और घुटनों में सूजन जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।

90 प्रतिशत जमीन पर खेती छूटने का दावा

श्रीगंगानगर जिले के ग्रामीणों के अनुसार, करीब 200 मुरब्बा कृषि भूमि प्रभावित है। इनमें लगभग 180 मुरब्बा में खेती पूरी तरह बंद हो चुकी है, जबकि करीब 20 मुरब्बा में आंशिक खेती हो रही है।

12 बीघा जमीन, छह लाख का कर्ज

चक 2 बीडब्ल्यूएसएम बरुवाला के अंग्रेज सिंह के पास 12 बीघा कृषि भूमि है। पिछले करीब तीन साल से अपेक्षित फसल नहीं हो रही है। खेती के लिए लिया गया करीब छह लाख रुपए का ऋण अब चुकाना मुश्किल हो गया है। बैंक की ओर से कुर्की का नोटिस भी मिल गया है।

घर की दीवारों पर भी नमक की परत

सेवानिवृत्त शिक्षक जरनैल सिंह के अनुसार, कई परिवार दूसरे इलाकों में जमीन ठेके पर लेकर खेती करने को मजबूर हैं। गृहिणी अमनदीप कौर बताती हैं कि दीवारों पर नमक चढ़ने से घरों की हालत बिगड़ रही है। गोबर का लेप करने के कुछ ही दिन बाद वह भी उतरने लगता है।

2015 से सर्वे…

किसानों के मुताबिक, वर्ष 2015 में समस्या का सर्वे किया गया था। इसके बाद भी समय-समय पर स्थिति का जायजा लिया गया, लेकिन खेतों से पानी निकालने या जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने की स्थायी व्यवस्था नहीं हुई।

डॉक्टर बोले- लवण और फ्लोराइड हो सकते हैं कारण

दांतों में पीलापन, जोड़ों में दर्द, घुटनों में सूजन और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं के मरीज अधिक आ रहे हैं। प्रथम दृष्टया इसकी वजह पेयजल में लवण और फ्लोराइड की अधिकता हो सकती है।
-डॉ. राकेश यादव, हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ, राजकीय चिकित्सालय, रायसिंहनगर

गहरे बोर से निकासी की संभावना तलाशें

भारत-पाक सीमा के समानांतर बहने वाली पाकिस्तान की सादकी नहर से निकलने वाली हाकड़ा ब्रांच में पानी का रिसाव सेम की समस्या का संभावित कारण हो सकता है। क्षेत्र की चिकनी मिट्टी पानी को नीचे जाने से रोकती है, जिससे जलभराव और खारापन बढ़ता है। खारे पानी की निकासी की संभावनाएं तलाशने के लिए 700 फीट गहरे और 10 इंच व्यास वाले बोर करवाए जा सकते हैं।
-डॉ. श्याम सुंदर खींची, प्रोफेसर, भू-गर्भ विज्ञान, डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज, श्रीगंगानगर

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