
श्रीगंगानगर. अनूपगढ़.
सरकार एक ओर जहां स्वास्थ्य सुविधाओं पर करोड़ों रुपए खर्च कर गांव और ढाणी तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने का दावा करती है, वहीं समय-समय पर ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जो ऐसे दावों को झूठा साबित करती हैं। ऐसा दृश्य देखकर मानव में भी मानवता नहीं जागती, यह भी बड़ा दु:खदायी है। कुछ समय पूर्व उड़ीसा राज्य के दाना माझी का मामला देश के सामने आया था, जिसकी पत्नी की अस्पताल में मौत हो गई थी।
अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिलने पर माझी पत्नी के शव को कंधे पर लेकर 12 किलोमीटर पैदल चलकर गांव पहुंचा था। अब ताजा मामला श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र का है, जहां वाहन के अभाव में एक बुजुर्ग इतना बेबस हो गया कि उसे बीमार पत्नी को गोद में उठाकर चिकित्सक के पास ले जाना पड़ा। यही नहीं, इलाज के बाद भी वाहन की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी, जिस कारण बुजुर्ग वापसी में भी पत्नी को गोद में लेकर गांव तक पहुंचा।
जानकारी के अनुसार गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले करीब 70 वर्षीय 3 एलएम निवासी पदमाराम की पत्नी की तबीयत खराब हो गई। उसके पास अपनी पत्नी को चिकित्सक के पास ले जाने के लिए वाहन के पैसे नहीं थे। इस पर ढलती उम्र में इन सब की परवाह किए बिना पदमा राम ने पत्नी माया देवी को गोद में उठाया और गांव 6 एनडी के लिए निकल पड़ा। इतना ही नहीं, 6 एनडी में चिकित्सक से इलाज करवाने के बाद भी पदमाराम पत्नी को गोद में ही लेकर गांव पहुंचा।
Video: स्वच्छ भारत अभियान पर ग्रहण
ज्यादा खराब थी तबीयत
माया देवी का इलाज करने वाले चिकित्सक ने बताया कि माया देवी की हालत खराब थी। उसे हाई ब्लड प्रेशर तथा उल्टी और चक्कर आ रहे थे। चिकित्सक ने बताया कि पदमा राम इलाज करवाने के बाद पत्नी को वापिस अपनी गोद में उठाकर ले गया। उन्होंने बताया कि माया देवी को चक्कर आने की वजह से मोटरसाइकिल पर बिठाना सम्भव नहीं हो पा रहा था, नहीं तो वो उसे घर तक छोड़ देते।