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श्रीगंगानगर के मिनी बैंकों में 11 करोड़ से अधिक का घोटाला, किसानों-मजदूरों की गाढ़ी कमाई डूबी, उठे गंभीर सवाल

Sriganganagar News: श्रीगंगानगर जिले के 127 मिनी बैंकों में जमा करीब 150 करोड़ रुपए की बचत पर सवाल खड़े हो गए हैं। जैतसर समेत कई समितियों में 11.5 करोड़ रुपए से अधिक के गबन और वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। किसान-मजदूर अपनी जमा पूंजी लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

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Sriganganagar Mini Bank Scam

Sriganganagar Mini Bank Scam (Photo-AI)

Sriganganagar Mini Bank Scam: श्रीगंगानगर: ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने और किसान-मजदूरों की छोटी बचत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संचालित मिनी बैंक अब सहकारी व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। जिले की 127 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में संचालित मिनी बैंकों में करीब 150 करोड़ रुपए की जमा राशि निवेशित है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सामने आए करोड़ों रुपए के गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों ने इन संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

श्रीगंगानगर जिले में कई मिनी बैंकों में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हो चुका है। जैतसर क्षेत्र के 2 जीबी-ए मिनी बैंक में 8.92 करोड़ रुपए की अनियमितता सबसे बड़ा मामला है। इसके अलावा जानकीदासवाला और डूंगरसिंहपुरा समितियों में करीब एक-एक करोड़ रुपए, 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति में 50 लाख रुपए से अधिक तथा 10 जैड समिति में 16 लाख रुपए की गड़बड़ी सामने आ चुकी है। जांच में रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी प्रविष्टियां और जमा राशि के दुरुपयोग जैसे आरोप सामने आए हैं।

जमाकर्ता आज भी कर रहे इंतजार

चिंताजनक तथ्य यह है कि अधिकांश मामलों का खुलासा तब हुआ, जब कथित अनियमितताएं लंबे समय तक जारी रहने के कारण बड़ी राशि प्रभावित हो चुकी थी। शिकायतों के बाद जांच, निलंबन, नोटिस और एफआईआर जैसी कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन कई जमाकर्ता आज भी अपनी जमा पूंजी वापस पाने की राह देख रहे है। कुछ मामलों में न्यायिक प्रक्रियाओं के कारण वसूली और कार्रवाई लंबी खिंच रही है।

निगरानी तंत्र पर भी उठ रहे सवाल

इन मामलों ने सहकारी संस्थाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं। समितियों के संचालन, वित्तीय सत्यापन और ऑडिट की जिम्मेदारी विभिन्न स्तरों पर निर्धारित है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि निरीक्षण और लेखा परीक्षण नियमित रूप से किए जाते हैं तो करोड़ों रुपए की अनियमितताएं वर्षों तक पकड़ में क्यों नहीं आईं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था के लिए मिनी बैंक आवश्यक हैं, लेकिन इनके संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना समय की मांग है। डिजिटल लेखांकन, नियमित ऑडिट, आकस्मिक निरीक्षण और प्रभावी मॉनिटरिंग से ही जमाकर्ताओं का विश्वास बहाल किया जा सकता है।

भरोसा लौटाना सबसे बड़ी चुनौती

मिनी बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यहां जमा होने वाला पैसा किसी बड़े निवेशक का नहीं, बल्कि किसान, मजदूर और छोटे बचतकर्ताओं की जीवनभर की कमाई होती है। ऐसे में वित्तीय अनियमितताएं केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि पूरे सहकारी ढांचे की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। अब जरूरत दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जिसमें जमा राशि की सुरक्षा और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित हों।

कहां-कहां हुई गड़बड़ी

  • 2 जीबी-ए मिनी बैंक में 8.92 करोड़ रुपए
  • जानकीदासवाला मिनी बैंक में 1 करोड़ रुपए
  • डुंगरसिंहपुरा समिति में 1 करोड़ रुपए
  • 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 50 लाख रुपए से अधिक
  • 10 जैड समिति में 16 लाख रुपए
  • कुल उजागर राशि 11.5 करोड़ रुपए से अधिक

मिनी बैंकों में सामने आए अनियमितताओं के मामलों को गंभीरता से लिया गया है। जहां-जहां शिकायतें या गड़बड़ियां सामने आई हैं, वहां जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। मिनी बैंक केवल सीमित बैंकिंग सुविधाओं के लिए संचालित किए जाते हैं, इसलिए लोगों को इनमें बड़ी राशि जमा कराने से बचना चाहिए और लेन-देन करते समय पूरी जानकारी एवं रसीद अवश्य प्राप्त करनी चाहिए।
-संजय गर्ग, प्रबंध निदेशक (एमडी), दी गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक, श्रीगंगानगर

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