-विवाद के कई दिन बाद दर्ज हुआ मुकदमा
श्रीगंगानगर.
महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष के खिलाफ कोतवाली में दर्ज एससी-एसटी एक्ट के मामले ने पार्टी में चल रही गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मामला दर्ज होने के बाद भी गुटबाजी से इनकार कर रहे हैं। लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं कि इस मामले को घर में ही सुलटाने की बजाय थाने तक पहुंचने की नौबत क्यों आई। महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष नमिता सेठी के खिलाफ मामला सेवादल की महिला विंग की जिलाध्यक्ष राजलता वाल्मिकी ने दर्ज कराया है।
राजस्थान के उपचुनावों में मिली अप्रत्याशित सफलता से उत्साहित कांग्रेस ने पच्चीस सूत्री मांगों को लेकर 20 से 26 फरवरी तक कलक्ट्रेट के समक्ष धरना दिया था। धरने का तरीका शुद्ध गांधीवादी था, इसलिए झगड़े आदि की कोई आशंका नहीं थी। अंतिम दिन अर्थात् 26 फरवरी को धरने पर बैठने का मौका महिला कांग्रेस को मिला और छह दिन से चल रही गांधी गिरी का तंबू उखड़ गया। धरनास्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं का कहना है कि माला पहनाने और चाय का कप पकड़ाने की बात को लेकर शुरू हुआ विवाद अखबारों की सुर्खियां बनने के बाद थाने तक पहुंच जाएगा, यह तो उन्होंने सोचा ही नहीं था।
इसका असर तो पड़ेगा
विधानसभा चुनाव इसी साल के अंत में होने हैं। दो महिला नेत्रियों के बीच हुए झगड़े का निपटारा पार्टी स्तर पर होने की बजाय अदालत में हुआ तो इससे गुटबाजी की खाई और गहरी हो जाएगी। इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव में साफ दिखाई देगा कि एक पक्ष अपनी पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन करेगा तो दूसरा टांग खिंचाई कर गुटबाजी की दाल में तड़का लगाने का प्रयास करेगा। मतलब साफ है कि इसका नुकसान पार्टी प्रत्याशी को ही होगा।
समझौते का प्रयास नहीं
पार्टी में चल रही गुटबाजी का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि 26 फरवरी को हुए विवाद का निपटारा करने का प्रयास किसी नेता ने नहीं किया। राजबाला ने पुलिस को परिवाद 1 मार्च को दिया। उस दिन होली थी। इससे स्पष्ट है कि 'होली के दिन सब रंग खिल जाते हैं, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं की सोच पार्टी के किसी भी नेता के दिमाग में नहीं आई। सब अपनी-अपने होली में मस्त रहे और पुलिस ने राजबाला के परिवाद पर नमिता सेठी के खिलाफ दलित अत्याचार का मामला दर्ज कर लिया। अब मामला दर्ज हो गया है तो नेता लोग इस पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं। जिले के इतिहास में यह पहला मौका है जब कांग्रेस की दो महिला नेत्रियों के बीच हुई तकरार थाने की एफआईआर बनी है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है
उपचुनावों में पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा। ऐसे समय में दो महिला नेत्रियों के बीच मामूली विवाद का थाने तक पहुंचना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा नहीं होना चाहिए था। चालीस साल से हम पार्टी की सेवा कर रहे हैं परन्तु ऐसी नौबत कभी नहीं आई। विवाद के निपटारे का प्रयास करेंगे। वर्तमान में पार्टी हित को सर्वोपरि रखने की जरूरत है।
राजकुमार गौड, पीसीसी सदस्य
घमंड अच्छा नहीं होता
महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष में पद का घमंड आ गया है। राजलता वाल्मिकी से उन्होंने दुव्र्यवहार किया जो सही नहीं। इसके बावजूद उसने तीन दिन तक इंतजार किया। लेकिन कोई नहीं आया। पार्टी में जब सुनवाई नहीं हुई तो कानून का सहारा लेने के सिवाय और कोई चारा नहीं बचा था।
श्यामलाल शेखावाटी, महामंत्री, जिला कांग्रेस