
श्रीगंगानगर.
अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आंदोलन के तहत रविवार को शहर का राजकीय जिला चिकित्सालय सूना रहा। आम तौर पर रोगियों से अटा रहने वाला यह हॉस्पिटल रविवार सुबह खाली था।गलियारों में रोगी बेहद कम नजर आ रहे थे वहीं ओपीडी में भी डॉक्टर न के बराबर थे। चिकित्सालय प्रशासन ने भी मुश्किल से चौदह डॉक्टरों की व्यवस्था की हुई। इनमें भी करीब पांच डॉक्टर आयुर्वेद और होम्योपैथी से संबंधित थे। आलम यह था कि यदि कोई रोगी चिकित्सालय में पहुंच गया तो वह डॉक्टरों को ढूंढता नजर आया वहीं भर्ती रोगी भी डॉक्टरों का टोटा देख चिकित्सालय से बाहर का रुख करते नजर आए। स्थिति यह थी कि चिकित्सालय स्टाफ भी इन रोगियों को डिस्चार्ज करने के मूड में दिखा।
इलाज ही नहीं तो कैसे रुके यहां
सूरतगढ़ क्षेत्र से राजकीय जिला चिकित्सालय में आए गुरदास ने बताया कि उसकी मां को पेट की परेशानी है। उपचार के लिए श्रीगंगानगर भर्ती करवाया था लेकिन अब लगता नहीं कि यहां उपचार मिल पाएगा। उसका कहना था कि चिकित्सालय स्टाफ ने उसे दवाएं दे दी हैं, ऐसे में यहां रोगी को रखने का लाभ भी क्या है। इसी को देखते हुए अब रोगी को घर ही ले जा रहे हैं। गांव सोलह एमएल के जोगेंद्रसिंह का कहना था कि उसे भी चिकित्सालय प्रशासन ने डॉक्टरों की हड़ताल बताकर उसे भी डिस्चार्ज कर दिया है। अब वह करें तो क्या, निजी चिकित्सालय में जाने की स्थिति में नहीें हंू। दवाएं ले ली हैं तथा अब घर पर ही रहकर उपचार करवाएंगे।
वार्ड हो रहे हैं सूने
चिकित्सालय के वार्ड हड़ताल के बाद से लगभग सूने हैं, इनमें जहां राउंड लगाने के लिए डॉक्टर भी बेहद कम नजर आते हैं वहीं राजकीय चिकित्सालय जहां सामान्यत: रोगियों को बैड उपलब्ध ही नहीं हो पाते हैं वहीं अब आलम यह है कि अधिकांश बैड तो खाली हैं तथा जिन पर रोगी हैं वे या तो अन्यत्र जाने की स्थिति में नहीं है अथवा जाने की तैयारी ही कर रहे हैं।
अरिस्दा जिलाध्यक्ष चिकित्सालय में भर्ती
इस बीच शनिवार को न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिस्दा) के जिलाध्यक्ष डॉ.पवन सैनी रविवार को भी पुलिस सुरक्षा के बीच चिकित्सालय में भर्ती रहे। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी और विभाग के अन्य अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की। हालांकि संगठन के प्रमुख सदस्य इन दिनों भूमिगत होने के कारण वे संगठन के जिलाध्यक्ष से मुलाकात करने भी नहीं पहुंचे।
चिकित्सकों में खौफ, घरों से गायब
सात चिकित्सकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद डॉक्टरों में खौफ की स्थिति है। अधिकांश डॉक्टर घरों से गायब है। ये डॉक्टर फोन पर भी संपर्क में नहीं आ रहे हैं। चिकित्सकों को गिरफ्तारी का डर है, इस कारण अधिकांश डॉक्टर सामने ही नहीं आ रहे हैं।