वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कैम्पस में बकायदा दुकानदार चाय की दुकान पिछले छह महीने से लगने लगी है।
श्रीगंगानगर।
इसे जिला प्रशासन की दरियादिली कहे या फिर अस्थायी दुकानदारो को खुली छूट। एक साल पहले नगर परिषद प्रशासन ने गंगासिंह चौक क्षेत्र में जिन अस्थायी अतिक्रमण को साफ करने के लिए लगातार दो दिन कब्जे साफ करने का विशेष अभियान चलाकर अतिक्रमण मुक्त किए थे, वे अब फिर से काबिज हो गए हे। यहां तक कि जिला कलक्ट्रेट के अंदर पार्किग स्थल पर चाय की थड़ी की दुकान काबिज हो गई है। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कैम्पस में बकायदा दुकानदार चाय की दुकान पिछले छह महीने से लगने लगी है।
यही हाल पंचायत समिति श्रीगंगानगर का है, इस समिति परिसर में एक दुकानदार ने अपने काउण्टर तक रख दिए है जबकि चाय की थड़ी दूसरे छोर में खोल रखी है। जिला परिषद की चारदीवारी के बाहर फिर से अस्थायी दुकानें सज गई है। यही हाल कलक्ट्रेट के सामने चाय की थड़ी और पान बीड़ी के खोखों का है। वहीं अदालत परिसर के बाहर भी अस्थायी दुकानदारी अब स्थायी होने का रूप लेने लगी है। रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट से लेकर नगर परिषद के मुख्य गेट तक अस्थायी कब्जों की भरमार फिर से हो चुकी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कार्यालय के बाहर रेहडि़यों का जमावड़ा हो चुका है।
इस कारण वहां यातायात व्यवस्था चरमराने लगी है। रही कही कसर नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों ने पूरी कर दी है। इन अधिकारियों ने रेहडि़यों को हटाने की बजाय वहां कब्जे जमाए रखने की मूक सहमति दे दी है। इन कब्जों के आगे अमला नतमस्तक भगतसिंह चौक पर कई फूल विक्रेताओं ने लंबे समय से कब्जा जमा रखा है। पिछले साल ३१ दिसम्बर को इन कब्जों को साफ किया गया था लेकिन अब फिर यहां अस्थायी अतिक्रमण इतना फैल चुका है कि वहां लोग खड़े भी नहीं हो सकते।
यातायात पुलिस आए दिन इस चौराहे पर दुपहिया वाहनों की चैकिंग करती है, एेसे में वहां इन कब्जे के कारण आए दिन यातायात व्यवस्था प्रभावित रहता है। नगर परिषद अमला भी इन कब्जों के आगे नतमस्तक करता है। कब्जेधारकों ने अपना अतिक्रमण का दायरा अब आगे बढ़ा दिया है। अभियान की आवाज खामोश राजस्थान हाईकोर्ट में पूजा कॉलोनी के वेदप्रकाश जोशी ने शहर को कब्जा मुक्त करने के संबंध में याचिका दायर की थी, इस पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को कब्जे साफ कर हर माह रिपोर्ट पेश करने के आदेश किए थे।
लेकिन जोशी की मौत के बाद यह प्रक्रिया ठप हो गई है। पिछले एक साल में जिला प्रशासन की ओर से गठित मॉनीटरिंग कमेटी ने एक भी अतिक्रमण नहीं हटाया है। अब तक नगर परिषद और नगर विकास न्यास प्रशासन ने एक हजार अतिक्रमण साफ करवाए थे लेकिन तत्कालीन जिला कलक्टर पीसी किशन ने तब स्वीकारा था कि शहर में 25 हजार अतिक्रमण है, इसे हटाने में समय लग सकता है। तत्कालीन कलक्टर के तबादले और याचिकाकर्ता जोशी के निधन के बाद यह अभियान अब ठंडे बस्ते में चला गया है।