-नरमा-कपास में गुलाबी सुंडी के प्रकोप के चलते बढ़ा मूंग का बीजान क्षेत्र
जैतसर. पिछले कुछ वर्षों से नरमा-कपास की फसल में लगातार बढ़ रहे गुलाबी सुंडी के प्रकोप से परेशान किसानों ने इस बार खरीफ के बीजान में सिंचाई पानी की कम मांग वाली एवं कम समय में तैयार होने वाली मूंग की फसल पर विश्वास दिखाया है। जिसके चलते इस बार क्षेत्र में एक ओर जहां नरमा-कपास के बीजान का क्षेत्र कम हुआ है वहीं दूसरी ओर मूंग के बीजान का क्षेत्र बढ़ा है।
किसानों की माने तो मूंग की फसल पर पारिश्रमिक लागत तो कम रहती ही है, साथ ही फसल पकाने के लिए सिंचाई पानी की भी आवश्यकता भी कम रहती है। वहीं इस बार समय-समय पर लगातार होती रही बरसात ने भी मूंग का बीजान कर चुके किसानों को नहरी पानी से सिंचाई करने की आवश्यकता ही महसूस नहीं होने दी। वहीं विगत वर्षों में तैयार किये गये मूंग की उन्नत किस्मों के बीज से बढ़ी पैदावार भी किसानों की पसंद का कारण बना। ऐसे में अब खेतों में लहलहा रही मूंग की फसल किसानों के चेहरे की खुशी बढाने का काम कर रही है। सहायक कृषि अधिकारी दिनेश बिश्नोई ने बताया कि इस बार क्षेत्र में 390 हैक्टेयर क्षेत्र में मूंग का बीजान किया गया है। जो गत वर्ष से कहीं अधिक है।
इस बार क्षेत्र में हुई अच्छी बरसात ने किसानों को सिंचाई पानी की किल्लत से बचाये रखा। खरीफ के सीजन में बीजान की जाने वाली सभी फसलों के लिए इस बार समयानुकूल हुई बरसात ने सिंचाई का काम किया। वहीं असिंचित क्षेत्र में भी अच्छी बरसात के कारण फसलों में न केवल अच्छी बढवार दिखायी दे रही है बल्कि रोगों से बचाव भी बना हुआ है। वहीं उन्नत किस्म के बीजों की खेती व मौसम की अनुकूलता के चलते किसानों को इस बार उत्पादन भी सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है। जिन किसानों ने इस बार जून मध्य में मूंग का बीजान कर लिया, ऐसे किसानों के खेतों में मूंग की अच्छी फसल लहलहाती दिखायी दे रही है।
केन्द्र सरकार की ओर से इस बार मूंग की सरकारी खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 रुपये प्रति क्ंिवटल तय किया गया है। यदि प्रति बीघा औसत उत्पादन तीन से पांच क्ंिवटल तक रहता है तो यह छोटे किसान को भी पर्याप्त लाभ देने वाली स्थिति में रहेगा। वहीं जिले की अनाज मंडियों में भी अच्छी गुणवता के मूंग का बाजार भाव आठ हजार रुपए के लगभग बना हुआ है। ऐसे में किसान मूंग की फसल को लेकर उत्साहित है।