
श्रीगंगानगर.
शहर के एक निजी चिकित्सालय में गुरुवार को रोगी की मौत के बाद परिजन भड़क गए। उन्होंने चिकित्सालय प्रशासन के समक्ष विरोध जताया तथा परिसर में ही धरना लगा दिया।मौके पर श्रमिक संगठनों के कुछ सदस्य भी पहुंच गए। उन्होंने चिकित्सालय प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही का आरोप का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। चिकित्सालय प्रशासन और परिजनों के बीच समझौता होने तथा उपचार की एवज में ली गई राशि लौटाने पर मामला शांत हुआ।
यह था मामला
गांव 23 जैड के सतनामसिंह को बुधवार सुबह जली हुई हालत में बहल हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। परिजनों ने रोगी का उपचार शुरू करने की बात कहीं। इस पर चिकित्सालय प्रशासन ने रुपए जमा करवाने की बात कही। परिजनों का आरोप है कि रुपए जमा होने तक उपचार पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। परिजन कुलदीपसिंह ने बताया कि उन्होंने कुछ समय में रुपए जमा करवाने की बात कही थी। बाद में करीब 70 से 75 हजार रुपए जमा भी करवा दिए गए। कुलदीप का कहना था कि राशि जमा होने के करीब पंद्रह मिनट बाद चिकित्सालय प्रतिनिधि उनके पास आए और सतनामसिंह की मौत होने की जानकारी दी। इसके बाद रोगी के परिजनों में रोष फैल गया। मौके पर पहुंचे श्रमिक संगठन के कुलविंद्रसिंह और अन्य लोगों ने धरना लगा दिया।
वार्ता से सुलझा मामला
चिकित्सालय प्रबंधन ने मामला बिगड़ते देख परिजनों को वार्ता के लिए बुलाया। हॉस्पिटल के डॉ. नीरज मित्तल और रोगी के परिजनों में वार्ता हुई। इसमें चिकित्सालय प्रबंधन के राशि लौटाने पर सहमत होने पर मामला सुलझा। रोगी के परिजनों ने बताया कि उनसे करीब 75 हजार रुपए जमा करवाए गए थे। इनमें से करीब 35 हजार रुपए लौटा दिए गए।
लापरवाही के आरोप निराधार
रोगी बुधवार सुबह भर्ती हुआ था। उसे शुरू में ही उपचार का खर्च बता दिया गया था। रुपए मिलने तक उपचार में लारवाही बरतने का आरोप निराधार है। रोगी से 70 से 75 हजार रुपए लेने की बात भी गलत है। करीब 30 से 35 हजार रुपए लिए गए और यह राशि लौटा दी गई है।
-डॉ. नीरज मित्तल, उपचार करने वाले चिकित्सक।
यूं जला था रोगी
बताया जा रहा है कि सतनामसिंह गूणा निकालने के लिए गया था। रात के समय सर्दी के कारण अलाव जला लिया। वहीं, पास ही स्थित झोपड़ी में आग लग जाने से वह गंभीर रूप से जल गया।