श्री गंगानगर

दहेज नहीं, बेटी चाहिए… लौटाया 1 करोड़ 1 लाख 51 हजार का दहेज, एक रुपए और नारियल से रचा सामाजिक संदेश

Refuses to Accept Dowry: समाज में एक तरफ जहां एक और दहेज के नाम पर बहुओं और बेटियों को परेशान किया जा रहा है। वहीं वर पक्ष ने दुल्हन पक्ष से सिर्फ एक रुपया और नारियल लेकर समाज में नया संदेश दिया है।
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रा​यसिंहनगर में वर पक्ष ने लौटाए उपहार-नकदी, पत्रिका फोटो
रा​यसिंहनगर में वर पक्ष ने लौटाए उपहार-नकदी, पत्रिका फोटो

Refuses to Accept Dowry: समाज में एक तरफ जहां एक और दहेज के नाम पर बहुओं और बेटियों को परेशान किया जा रहा है। वहीं वर पक्ष ने दुल्हन पक्ष से सिर्फ एक रुपया और नारियल लेकर समाज में नया संदेश दिया है।
श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र में गांव 3 एनपी निवासी प्रमोद थालोड़ की पुत्री मानसी का विवाह शुक्रवार को 63 एलएनपी निवासी वीपी सिंह के साथ विधि-विधान से सम्पन्न हुआ। विवाह में वर पक्ष ने दिए गए कीमती उपहार और नकदी को लौटाकर सामाजिक संदेश दिया है। जिसकी अब हर कोई तारीफ कर रहा है।

डेढ़ करोड़ कीमत के उपहार- नकदी लौटाई

रायसिंहनगर क्षेत्र में शादी समारोह के दौरान वधू पक्ष की ओर से परंपरा अनुसार उपहार स्वरूप 1 करोड़ 1 लाख 51 हजार रुपए मूल्य की अचल संपत्ति, नकद राशि एवं कीमती सामान प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर दूल्हे के पिता सुभाष चन्द्र गोदारा ने ऐसा निर्णय लिया, जिसने समारोह में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। उन्होंने पूरे सम्मान के साथ यह समस्त दहेज लौटाते हुए भावुक शब्दों में कहा हमें दहेज नहीं, बेटी चाहिए।

उन्होंने पलभर भी वह राशि अपने हाथ में नहीं रखी और सम्पूर्ण संपत्ति, नकदी व कीमती सामान वधू पक्ष को लौटा दिया। उन्होंने केवल परंपरा निभाने के लिए एक रुपया और नारियल स्वीकार किया। इस दृश्य को देखकर दोनों परिवारों के साथ-साथ उपस्थित रिश्तेदार और ग्रामीण भावुक हो उठे।

किसान परिवार से ताल्लुक रखता दुल्हा

दूल्हा वीपी सिंह प्रोफेशनल अकाउंटिंग में एमबीए हैं और किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी खेती-बाड़ी स्वयं संभालते हैं और मेहनत को ही जीवन का आधार मानते हैं। वहीं दुल्हन मानसी कृषि विज्ञान में एमएससी तक शिक्षित हैं और संस्कारों के साथ आधुनिक शिक्षा का संतुलन रखती हैं।

दोनों का विवाह परिवार की सहमति से अरेंज मैरिज के रूप में संपन्न हुआ। दुल्हन के पिता एक निजी बैंक में अधिकारी पद पर कार्यरत हैं, जबकि माता एक गृहिणी हैं। परिवार की जड़ें आज भी गांव से जुड़ी हैं, जहां दादा देवीलाल थालौड़ खेत में बनी ढाणी में रहकर खेती-बाड़ी संभालते हैं।

Published on:
07 Feb 2026 01:02 pm