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Sri Ganganagar: नशे की दवा के कोडवर्ड में ‘हरा तोता’ और ‘नीला फोर्ड’ रखे नाम, प्रशासन ने कसा शिकंजा

Drug Abuse Medicines: श्रीगंगानगर जिले में युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने उन दवाइयों की खुली और अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगा दी है, जिनका इस्तेमाल इन दिनों नशे के रूप में किया जा रहा है।
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श्री गंगानगर

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Anand Prakash Yadav

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Updated: 25 Jun 2026, 12:24 PM IST

Anti Narcotics Initiative

श्रीगंगानगर में नशे की दवा की अवैध बिक्री पर शिकंजा, पत्रिका फाइल फोटो

Drug Abuse Medicines: श्रीगंगानगर जिले में युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने उन दवाइयों की खुली और अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगा दी है, जिनका इस्तेमाल इन दिनों नशे के रूप में किया जा रहा है। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. अमित यादव ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर प्रीगाबलिन, टापेंटाडोल और जोपिक्लोन साल्ट आधारित दवाइयों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से सख्त नियंत्रण लागू कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे श्रीगंगानगर जिले में लागू हो गया है और अगले दो माह तक प्रभावी रहेगा।

नशे की दवा के रखे कोडवर्ड

श्रीगंगानगर जिला प्रशासन ने जिन दवाओं की बिक्री पर शिकंजा कसा गया है, वे एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित मादक पदार्थों की श्रेणी में भले न आती हों, लेकिन जिले में इनका दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। नशे की दुनिया की कूट भाषा में इन्हें ‘सिग्नेचर’, ‘जॉडियर’, ‘हरा तोता’, ‘संतरी’, ‘हरे कैप्सूल’ और ‘नीला फोर्ड’ जैसे नामों से जाना जा रहा है। अभी तक बाजार में नशीली दवा की धड़ल्ले से बिक्री होने की शिकायतें जिला प्रशासन को मिल रही थी। यही वजह है कि लोकहित और नवयुवकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने इन पर सख्त निगरानी का फैसला लिया है।

आदेश में यह प्रावधान

आदेश के तहत 75 मिलीग्राम से अधिक प्रीगाबलिन, टापेंटाडोल और जोपिक्लोन युक्त दवाइयों का क्रय-विक्रय बिना बिल नहीं किया जा सकेगा। खुदरा विक्रेता इन दवाओं की बिक्री केवल चिकित्सक की मूल पर्ची पर करेंगे और उस पर अपनी मुहर व दिनांक अंकित करना अनिवार्य होगा। वहीं थोक विक्रेताओं को इन दवाइयों का बैच नंबर सहित दैनिक स्टॉक रजिस्टर रखना होगा और उसकी साप्ताहिक रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक व प्रशासन को भेजनी होगी। डॉक्टर की पर्ची के बिना दवा बिक्री पर दवा स्टोर संचालक के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करेगा।

मेडिकल स्टोर का निरीक्षण

प्रशासन ने यह भी तय किया है कि सहायक औषधि नियंत्रक, उपखंड अधिकारी और पुलिस विभाग संयुक्त टीमें बनाकर हर माह 3 से 5 तारीख के बीच मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण करेंगे। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या आदेश उल्लंघन मिलने पर संबंधित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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