आंगनबाड़ी केन्द्रों में सुविधाओं की अनेदखी
श्रीगंगानगर। महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्री स्कूल का रूप देने के लिए कागजों में सुविधा दे दी लेकिन हकीकत में एक कमरे में एेसे केन्द्र संचालित हो रहे है। संकरे इन कक्ष में बच्चों को बैठने की पूरी व्यवस्था तक नहीं है। पत्रिका टीम ने बुधवार को एेसे कई केन्द्रों को खंगाला तो वहां कार्यकर्ता, आशा सहयोगिन और सहायिकाओं ने हकीकत बयां कर दी। इन महिला मानदेय कार्मिकों का कहना था कि विभागीय आदेश के अनुरुप प्री स्कूल का टाइमटेबल तो लागू कर दिया।
लेकिन इतनी जगह तक नहीं है कि वहां बच्चों को खेलकूद या सुविधा दी जा सके। इन प्री स्कूलों के नाम से विभागीय बजट को खपाया जा रहा है लेकिन लाभाविंत तक यह सुविधा दूर है। अग्रसेननगर, जवाहरनगर, इंदिरा कॉलोनी, ब्लॉक एरिया और पुरानी आबादी के कई केन्द्रों में संकरे कमरे में संचालित मिले। टांगा टाइमटेबल का पर्चा इन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जारी किए गए टाइमटेबल का पर्चा टांगा हुआ मिला।
विभाग ने केन्द्रों का समय सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक कर रखा है। इसमें सुबह दस बजे प्रार्थना सत्र, सुबह १०:३० बजे व्यायाम व खेल सत्र, सुबह ११ बजे अल्पाहार, सुबह ११:३० बजे भाषा सत्र, दोपहर १२ बजे रचानात्मक सत्र, दोपहर १२:३० बजे बौद्विक सत्र, दोपहर एक बजे भोजन सत्र, दोपहर डेढ़ बजे स्वतंत्र खेल आयोजित कराने के आदेश है। खुद का भवन नहीं एक ही कक्ष में केन्द्र में बच्चे और तीन मानदेय कार्मिक बैठते है।
इस कमरे के बाहर आंगनबाड़ी बोर्ड का नाम अंकित है। यह कमरा भी महिला एवं बाल विकास विभाग का नहीं बल्कि किराये का है। मकान मालिक को एक हजार से डेढ़ हजार रुपए मासिक किराये के रूप में चुकाना पड़ता है। लेकिन विभाग अधिकतम राशि साढ़े सात सौ रुपए मासिक की दर से किराया चुकाता है। वहीं इसी कक्ष में पोषाहार का सामान, बच्चो के खिलौने और स्टेशरी का सामान भी रखा जाता फर्श पर दरी पर एेसी ठंड कि लगातार दो घंटे बैठ जाएं तो धुजणी छुडाने लगती है।