
श्रीगंगानगर.
चिकित्सकों के आंदोलन के तहत अब शहर का राजकीय जिला चिकित्सालय महज चौदह चिकित्सकों के सहारे है। इनमें भी चिकित्सालय के तेरह ही चिकित्सक है। एक चिकित्सक को सीएमएचओ कार्यालय से लगाया गया है। इनमें भी सीधे तौर पर पर एलोपैथी से जुड़े चिकित्सक महज आठ ही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं गड़बड़ा गई हैं। वार्डों से अधिकांश रोगी या तो स्वयं ही चले गए अथवा उन्हें चिकित्सालय स्टाफ ने ही डॉक्टर नहीं होने का हवाला देते हुए दवाएं देकर घर रवाना कर दिया। सोमवार तक सत्रह चिकित्सकों के सहयोग से भी चिकित्सालय की व्यवस्थाएं मुश्किल तरीके से संचालित की जा रही थीं। इनमें से भी तीन चिकित्सक जाने के बाद अब हालात खराब हो गए हैं।
दो डॉक्टर मेडिकल अवकाश पर
सोमवार तक कार्यरत चिकित्सकों में से दो चिकित्सक मंगलवार को मेडिकल अवकाश पर चले गए। इसमें डॉ.रवींद्र गोदारा की हालत बिगडऩे पर उन्हें चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया। उन्हे हृदय संबंधी परेशानी बताई गई है। जहां से उन्हें चिकित्सकों ने अन्यत्र रेफर कर दिया। डॉ. इंद्राज सहारण भी स्वास्थ्य कारणों से मंगलवार को अवकाश पर चले गए। एक अन्य चिकित्सक डॉ. प्रमोद चौधरी भी अवकाश पर चले गए। इस प्रकार चिकित्सालय प्रबंधन को मंगलवार को व्यवस्थाएं संभालने में जोर आया।
मेडिकल बोर्ड से होगी जांच
इस बीच चिकित्सकों के मेडिकल अवकाश पर जाने के बाद चिकित्सा विभाग के निदेशक ने ऐसे डॉक्टरों की जांच मेडिकल बोर्ड से करवाने के निर्देश दिए हैं। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनीता सरदाना के अनुसार चिकित्सा विभाग के निदेशक के निर्देशानुसार ऐसे डॉक्टरों की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा।
ओपीडी रही सूनी
इस बीच चिकित्सालय की ओपीडी मंगलवार को सूनी रही। दिन में कक्ष तो खुले रहे लेकिन डॉक्टर इक्का-दुक्का कक्षों में ही नजर आए। चिकित्सालय में वैसे तो सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी कम संख्या में रोगी आ रहे हैं लेकिन जो रोगी चिकित्सालय पहुंचे उनमें से अधिकांश को निराश लौटना पड़ा।
वार्डों में पसरा सन्नाटा
जहां एक ओर ओपीडी सूनी है वहीं वार्डों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। कई वार्ड तो पूरे के पूरे खाली पड़े हैं। वहीं कुछ वार्डों में इक्का दुक्का रोगी हैं, इन्हें संभालने के लिए नर्सिंग कर्मचारी ही हैं। दिन में एक दो बार उपलब्ध डॉक्टरों से ही रोगियों की जांच करवाई जा रही है।