- सबसे ज्यादा कोतवाली क्षेत्र में साठ और शेष 35 अन्य थाना क्षेत्र में गुमशुदा या चोरी हुए थे ये मोबाइल
श्रीगंगानगर। पुलिस ने साइबर अपराध और अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान ऑपरेशन एंटीवायरस के तहत गुरुवार को 18 लाख रुपए की कीमत के 95 मोबाइल को उनके मालिकों को सुपुर्द किए। इसमें कोतवाली क्षेत्र के साठ मोबाइल और अन्य थाना क्षेत्र के 35 मोबाइल शामिल हैँ। गत एक साल की समय अवधि में करीब चालीस लाख रुपए की कीमत के दो सौ मोबाइल को ट्रेस कर बरामदगी की। इसके बाद मोबाइल फोन को संबंधित मालिको को वापस दिए जा चुके हैँ।
पुलिस अधीक्षक गौरव यादव ने बताया कि पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर 10 से 31 जुलाई तक साइबर अपराध व अपराधियों के विरूद्ध विशेष अभियान ऑपरेशन एंटीवायरस चलाया गया। इस अभियान के तहत जिले में पिछले काफी समय से मोबाइल छीनाछपटी या चोरी व गुमशुदा मोबाइलो को ट्रेस कर बरामद करनेके लिए सीओ सिटी आईपीएस बी आदित्य की अगुवाई में पुलिस टीम गठित की गई। इस टीम ने ऑपरेशन एंटीवायरस अभियान के तहत सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर पोर्टल व अन्य तकनीकी साधनों की सहायता से कुल 95 मोबाइल बरामद किए। इसमें 60 मोबाइल कोतवाली क्षेत्र और 35 मोबाइल एसपी ऑफिस िस्थत सीडीआर सैल कार्यालय की ओर से ट्रेस कर बिहार, उतरप्रदेश, पंजाब, राजस्थान से बरामद कर मोबाइल मालिकों को सुपुर्द किए गए। इस अभियान के तहत गठित टीम में सीओ सिटी के अलावा कोतवाली सीआई पृथ्वीपालसिह, हैंड कांस्टेबल राकेश कुमार, कांस्टेबल सुनील कुमार, दूसरी टीम में एएसआई गुरतेज सिंह, कांस्टेबल विनोद कुमार,विजय कुमार, सीडीआर सैल के देवकीनंदन की विशेष भूमिका रही।
इधर, सीओ सिटी ने बताया कि कोतवाली परिसर में मोबाइल को उनके मालिकों से बिल संबंधित जानकारी मांगी गई और एक साथ मोबाइल वापस लौटाने की प्रक्रिया अपनाई गई। गुरुवार को करीब पचास मोबाइल संबंधित मालिको के आने पर लौटाए गए। शेष को सूचना दी गई हैँ। उन्होंने बताया कि कई और भी मोबाइल गुम या चोरी या छीनाझपट़टी की वारदात के दौरान गायब हुए हैँ, ऐसे मोबाइल को संबंधित पोर्टल पर एंट्री कराने वाले की सूची बनाकर सीडीआर सैल के माध्यम से ट्रैस करने का प्रयास किया जा रहा हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से सिटीजन एप के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल गुम या छीनाझपट़टी या चोरी होने पर अपनी शिकायत करवा सकते हैँ। इस शिकायत में मोबाइल के बारे में मांगी गई जानकारी के बारे में सूचना एकत्र कर ट्रैकिंग पर लगाया जाता हैँ। इसके आधार पर मोबाइल की लोकेशन आने पर बरामदगी की प्रक्रिया अपनाई जाती हैँ।