श्री गंगानगर

श्रीगंगानगर विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक दलों में गुटबाजी फिर बढ़ी

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Political parties clash again after Sriganganagar assembly elections
श्रीगंगानगर विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक दलों में गुटबाजी फिर बढ़ी

श्रीगंगानगर। विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बावजूद जिला मुख्यालय पर कांग्रेस में खींचतान कम नहीं हो पाई है। यहीं हाल भाजपा का है। भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी श्रीगंगानगर विधानसभा चुनाव में हार चुके है।

ऐसे में तवज्जो दोनों दलों के हारे हुए प्रत्याशियों को देने का प्रयास किया जा रहा है। इन प्रत्याशियों ने अपने स्तर पर गुटबाजी का बढ़ावा देना भी शुरू कर दिया है। चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अशोक चांडक पराजित हो गए थे और कांग्रेस के बागी होकर चुनाव लड़े राजकुमार गौड़ विधायक भी चुने गए लेकिन खींचतान का दायरा अब तक दूर नहीं हो पाया है।

चांडक ने अपने खेमे में जिलाध्यक्ष संतोष सहारण, यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष ज्योति कांडा, होलसेल भंडार के अध्यक्ष शिवदयाल गुप्ता, नगर परिषद के पूर्व सभापति जगदीश जांदू के अलावा अपने अनुज और नगर परिषद के वर्तमान सभापति अजय चांडक को खेमे में शामिल कर नवनिर्वाचित विधायक राजकुमार गौड़ और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव हारे बिहाणी शिक्षा न्यास के अध्यक्ष जयदीप बिहाणी के समर्थकों को जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में ज्यादा तवज्जों नहीं देने की प्रकिया अपना रखी है।

यही वजह है कि दो दिन पहले प्रदेश के शिक्षा मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा के दौरे पर चांडक को विधायक गौड़ से ज्यादा तवज्जो दी गई थी। यहां तक कि जिला कलक्ट्रेट के सभागार में जिले के अधिकारियों की बैठक में गौड़ के साथ चांडक को बिठाया गया। हालांकि कांग्रेस हाईकमान ने अभी इस गुटबाजी को खत्म करने के लिए ज्यादा कुछ दखलदांजी नहीं दी है। लेकिन कुछ समय आने वाले लोकसभा चुनाव में यह गुटबाजी भाजपा के लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है।

इधर, भाजपा के पुराने कार्यकर्ता प्रत्याशी रही विनीता आहुजा को दरकिनार करने के लिए बार बार जिलाध्यक्ष हरीसिंह कामरा पर दबाव डाल रहे है। लेकिन कामरा भी हाईकमान के आदेश के आगे बेबस नजर आ रहे है। आहुजा के पति डा.़दर्शन आहुजा के जुबिन नर्सिग की एक बिल्डिंग में भाजपा कार्यालय खोलकर यह संकेत दे दिया है कि अगले पांच साल तक उनके यहां भाजपाई नतमस्तक करेंगे। ऐसे में आहुजा के खिलाफत करने वाले भाजपाई अब यदाकदा बैठकों में देखने को मिलेंगे। लोकसभा चुनाव में भाजपा की टिकट दावेदारों ने इस गुटबाजी से उबारने के लिए हाईकमान तक अपना फीडबैक दिया है।

एक दिन पहले भाजपा की बैठक में भी यही हाल देखने को मिला। लेकिन मौजूदा स्थिति में ऐसा अभी तक कुछ बदलाव दिख नहीं रहा है। इन दोनों दलों के अंदुरुनी गुटबाजी का असर जनहित मुद्दो पर जरूर असर दिखेगा। कोई गुट किसी मुददे पर काम करवाना चाहेगा तो उसके खिलाफत के लोग इसे पूरा नहीं होने देंगे।

Updated on:
09 Jan 2019 01:45 pm
Published on:
09 Jan 2019 01:45 pm