
श्रीगंगानगर.
सब्जी के बढ़े हुए दाम ने आजकल रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। तुलना पिछले साल से करें तो सौ से डेढ़ सौ फीसदी तक सब्जियों के भाव में इजाफा हुआ है।लगातार बढ़ रहे भाव को देखते हुए लोगों का हरी सब्जियों से ही मोहभंग हो रहा है। गृहणियों की मानें तो पहले रसोई के लिए दिए जाने वाले बजट में से रुपए बच जाते थे, लेकिन इस बार बचत तो दूर 15 दिन बाद ही रुपयों की तंगी आ जाती है। यह स्थिति भी तब है जब सिर्फ सब्जियां ही खरीद रहे हैं, फल तो भूल ही गए हैं।
खासकर तड़के में इस्तेमाल होने वाला प्याज काफी दिनों से रुला रहा तो टमाटर भी भाव के मामले में लाल हुआ पड़ा है। हरी मिर्च ज्यादा ही तीखी हो गई है।अब तो एक बार फिर से दाल रोटी की तरफ आना पड़ रहा है। इसमें भी अगर कोई घर में बीमार हो जाए और उसको डॉक्टर हरी सब्जियां खिलाने को कह दे तो ये और भी मुश्किल हो जाता है।
2016 और 2017 में भाव में अंतर
सब्जी -2016 -2017
प्याज -10 - 50
टमाटर -20 -50
गाजर -15 -30
हरी मीर्च - 20 -40
गोभी -10 -30
आलू का ही सहारा
सब्जियों में अगर कोई सस्ते में गिना जाए तो आलू और लहसून ही है। आलू पिछले साल इस समय बीस रुपए प्रति किलो था जो इस बार पांच रुपए प्रति किलो तक आम आदमी को मिल जाता है। वहीं, लहसून भी पिछले साल एक सौ बीस रुपए प्रति किलो था जो इस बार सिर्फ बीस रुपए किलो मिल रहा है।
इनका कहना है
-पिछले साल के मुकाबले इस बार सब्जियों के दाम आसमान को छू रहे हैं। रोज-रोज बच्चे भी दाल रोटी खाने से इनकार कर देते हैं। लेकिन बाजार में सब्जियां लेने जाते हैं और सौ रुपए में बस थोड़ी सी सब्जी लेकर आ जाते हैं। क्या करें समझ में नहीं आ रहा है।
लक्ष्मी देवी, पुरानी आबादी।