
श्रीगंगानगर.
शिक्षा-चिकित्सा बचाओ जन अभियान ने जिले के चार स्कूलों का निजीकरण करने का विरोध शुरू कर दिया है। इसको लेकर बुधवार को कलक्ट्रेट पर शिक्षकों ने विरोध-प्रदर्शन कर उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया है।पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर राज्य के 300 और जिले के चार शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों को देने का राज्य सरकार ने निर्णय किया है। इसका विभिन्न शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। इसे वापस नहीं लेने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) के मंत्री सुभाष सहारण का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने पूर्व में एकीकरण के नाम पर बीस हजार से अधिक विद्यालयों को बंद कर दिया और अब राजकीय विद्यालयों को शिक्षा व्यापारियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पीपीपी का निर्णय का अनुचित और जनविरोधी है। शिक्षकों ने कहा कि राजकीय विद्यालयों का निजीकरण करने से आमजन के हितों पर कुठाराघात होगा। शिक्षा का अधिकार निष्प्रभावी होगा और रोजगार के अवसर समाप्त होंगे। वहीं, राजकीय संपत्ति खुर्दबुर्द होगी। शिक्षकों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है यदि जल्द इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
इन स्कूलों को दिया पीपीपी पर
शिक्षा विभाग के अनुसार राज्य में तीन सौ और श्रीगंगानगर जिले में चार सौ स्कूलों को पीपीपी पर देने का निर्णय किया जा चुका है। इसमें श्रीगंगानगर जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालय नंबर चार सूरतगढ़, राजकीय माध्यमिक विद्यालय पुरानी आबादी सूरतगढ़ और ग्रामीण क्षेत्र के राजकीय माध्यमिक विद्यालय 21 जीजी व राजकीय माध्यमिक स्कूल प्रतापपुरा (सादुलशहर) को पीपीपी पर संचालित किया जाएगा। प्रदेश में सबसे ज्यादा 27 स्कूल नागौर एवं 24 चूरू तथा सबसे कम बारां व कोटा में एक-एक स्कूल को पीपीपी मोड पर दिया है।