
हनुमानगढ.
बरसात के दिनों में नहरों में आने वाली केली की समस्या से निपटने के लिए राजस्थान को अब पंजाब की ओर से तैयार किए जा रहे जुगाड़ का इंतजार है।गत दिनों केली कटर मशीन का इंदिरागांधी मुख्य नहर में किया गया प्रयोग असफल रहने पर स्थानीय अधिकारियों ने अब पंजाब की कई एक्सक्वेटर व लोंग बूम मशीन निर्माताओं से संपर्क किया है। इसमें लोंग बूम मशीने के आगे पंजे का साइज बड़ा करने से केली हटाने की रफ्तार तेज होने की संभावना है। साथ ही लागत भी मामूली होने से राजस्थान में इस जुगाड़ के उपयोगी साबित होने की संभावना है। पूर्व में केली कटर मशीन के लिए करीब चार करोड़ का बजट मंजूर हुआ था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने मसीतावाली हैड पर इसका प्रयोग भी किया।
लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण यह मशीन यहां पर कारगर सिद्ध नहीं हुई। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए अन्य कंपनियों से संपर्क किया है। अधिकारियों के अनुसार गत बरसों में नहरों में केली फंसने से पंजाब क्षेत्र में तीन पुल भी क्षतिग्रस्त हो गए थे। ओवरफ्लो के चलते राजस्थान की नहरों में पानी का प्रवाह भी बाधित रहा था। अब एक साथ कई लोंगबूम मशीनों में पंजा लगाने से केली समस्या से निजात मिलने की संभावना है। इस बारे में जल संसाधन उत्तर संभाग के मुख्य अभियंता केएल जाखड़ ने बताया कि पंजाब में मशीन निर्माता कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं। उनके आगे लगने वाले पंजे की डिजाइन मंगवाई है। तकनीकी टीम की ओर से मॉडल को हरी झंडी मिलने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
सस्ते में समाधान
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केली कटर मशीन के लिए चार करोड़ से अधिक का बजट मंजूर हुआ है। जबकि लोंग बूम मशीन की लागत करीब 30 लाख रुपए है। इसके आगे लगने वाले पंजे की लागत भी 70 से 80 हजार के बीच है। विभाग के पास कुछ ऐसी मशीनें उपलब्ध भी है। जुगाडऩुमा पंजा लगाने पर यदि केली की समस्या का समाधान होता है तो कुछ और लोंग बूम मशीन खरीदकर उसके आगे पंजा लगाकर केली हटाने की समस्या दूर हो सकती है। इस कार्य में बजट भी कम लगेगा।