- राजस्थान सरकार ने उठाया कदम, सरसों तेल इकाइयों को राहत, निजी संस्थानों से तकनीकी अपग्रेडेशन की भी सुविधा बढ़ी
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार ने स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी)-2024 नीति में दो महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब सरसों तेल उत्पादन से जुड़ी इकाइयों को विस्तार करने पर भी मार्जिन मनी अनुदान का लाभ मिलेगा। साथ ही तकनीकी उन्नयन के लिए निजी संस्थानों की भागीदारी को भी मंजूरी दी गई है। यह जानकारी देते हुए जिला उद्योग एवं वाणिज्य महाप्रबंधक हरीश मित्तल ने बताया कि प्रदेश में स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए यह संशोधन लागू किए गए हैं। नए संशोधन के अनुसार ओडीओपी के तहत अब सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को केवल नई इकाई स्थापित करने पर ही नहीं, बल्कि विस्तार (एक्सपेंशन) करने पर भी 20 लाख रुपये तक का मार्जिन मनी अनुदान मिलेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने 15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट प्रावधान भी किया है। पूर्व में यह लाभ केवल नई इकाइयों को दिया जाता था, लेकिन अब विस्तार करने वाली इकाइयां भी इस योजना का लाभ ले सकेंगी। इससे विशेष रूप से सरसों तेल उत्पादन से जुड़ी इकाइयों को बड़ा फायदा मिलेगा। दूसरे महत्वपूर्ण बदलाव के तहत अब उद्यम निजी संस्थानों के माध्यम से भी तकनीकी अपग्रेडेशन कर सकेंगे। इसके लिए अधिकतम 5 लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। पहले यह सुविधा केवल सरकारी संस्थानों के जरिए उपलब्ध थी। इस बदलाव से उद्योगों को आधुनिक मशीनरी और तकनीक अपनाने में आसानी होगी, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और क्षमता दोनों में सुधार होगा।
ओडीओपी योजना से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
ओडीओपी नीति के तहत राज्य के 41 जिलों में एक-एक उत्पाद को पहचान दी गई है। योजना का उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को मजबूत कर रोजगार के अवसर बढ़ाना और उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचाना है। इसके अलावा योजना में क्वालिटी सर्टिफिकेशन, मार्केटिंग सहायता, ई-कॉमर्स प्रोत्साहन और कैट लॉगिंग जैसी सुविधाओं पर भी वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। राज्य के जिलों के विशिष्ट उत्पादों और शिल्पों को बढ़ावा देने के लिए ओडीओपी नीति लाई गई है, जिससे कारीगरों, शिल्पकारों, कृषकों और उत्पाद निर्माताओं की आय में बढ़ोतरी होगी. इस नीति की मदद से ओडीओपी उत्पादों के लिए एकीकृत बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा और इन्हें विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता भी मिलेगी। राज्य में क्लस्टर आधारित विकास के जरिए शिल्पकारों और लघु उद्योगों की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा. इसके माध्यम से राज्य में हस्तशिल्प, हथकरघा और एमएसएमई क्षेत्र की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं कार्यक्षमता को बढ़ाकर उन्हें वैश्विक बाजार के अनुरूप विकसित किया जाएगा।