पढ़ाई के नाम पर वे मोबाइल में रील और शाट्र्स देखते रहते हैं। इससे उनका मानसिक विकास दूसरी दिशा में हो रहा है। वे दोअर्थी बातों को तेजी से समझने लगे हैं और अपने दोस्तों के बीच इन्हीं शब्दों का प्रयोग भी कर रहे हैं।
महेन्द्र सिंह शेखावत
Sri Ganganagar News : श्रीगंगानगर. सोशल मीडिया इन दिनों बिना लगाम के घोड़े जैसा हो गया है। प्रभावी नियंत्रण के बिना इस पर खुलेपन के नाम पर फूहड़ता, बेशर्मी और अश्लीलता परोसी जा रही है। इससे पारिवारिक संस्कार दरक रहे और बच्चे बिगड़ते जा रहे हैं। पढ़ाई के नाम पर वे मोबाइल में रील और शाट्र्स देखते रहते हैं। इससे उनका मानसिक विकास दूसरी दिशा में हो रहा है। वे दोअर्थी बातों को तेजी से समझने लगे हैं और अपने दोस्तों के बीच इन्हीं शब्दों का प्रयोग भी कर रहे हैं। इसका सबसे घातक परिणाम यह है कि बच्चों का परिजन से संवाद लगातार कम हो रहा है।
बच्चों के मन में आपराधिक सोच बढ़ रही है। इन्हीं सब मुद्दों पर पत्रिका ने प्रदेशभर के पाठकों में एक सर्वे करवाया है। जिसमें सर्वाधिक 97 फीसदी लोगों ने माना कि सोशल मीडिया से अश्लीलता को बढ़ावा मिल रहा है, जो बच्चों के दिल-ओ-दिमाग पर गलत असर डाल रहा है। सर्वे में विभिन्न आयु वर्ग के पाठकों से सोशल मीडिया का दखल एवं समाज पर उससे पड़ रहे असर से संबंधित सवाल पूछे गए थे।
93 फीसदी ने देखी आपत्तिजनक पोस्ट
सर्वे में 93 फीसदी से अधिक लोगों ने माना कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई न कोई आपत्तिजनक पोस्ट देखी है। रील्स बनाने की अंधी दौड़ को भी 94 फीसदी से अधिक पाठकों ने गलत बताया है। इसी तरह 93 फीसदी से अधिक लोगों ने सोशल मीडिया पर सेंसर का समर्थन किया है।
सामाजिक विकार दे रहा सोशल मीडिया
सर्वे में 98.5 फीसदी लोगों ने माना कि सोशल मीडिया किसी न किसी तरह से युवाओं और बच्चों के मन मस्तिष्क में सामाजिक विकार पैदा कर रहा है। इससे बच्चों की एकाग्रता खत्म हो रही है। ज्यादा स्क्रीन टाइम होने से बच्चों की नींद प्रभावित हो रही है, जिससे उनकी पढ़ाई और मेमोरी प्रभावित हो रही है। बच्चे अपनी शैक्षणिक क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।