- दो साल पहले दुल्लापुर कैरी से किया था बालक का अपहरण
श्रीगंगानगर.
दो साल पहले दुल्लापुर कैरी गांव से छह वर्षीय बालक का अपहरण कर पांच लाख रुपए की फिरौती मांगने के जुर्म में अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास से दंडित किया है।यह निर्णय बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (संख्या-दो) पलविन्द्र सिंह ने सुनाया। तीनों में से मुख्य आरोपित देवेन्द्र सोनी 20 जनवरी 2015 को गिरफ्तारी से लेकर अब तक न्यायिक अभिरक्षा में था जबकि दो आरोपित जमानत पर रिहा थे। सजा सुनाने के बाद तीनों को केन्द्रीय कारागृह भिजवा दिया।
अपर लोक अभियोजक दिनेश नागपाल ने बताया कि 18 जनवरी 2015 को हिन्दुमलकोट थाना क्षेत्र के गांव दुल्लापुर कैरी निवासी पहलवान सिंह पुत्र बंतासिंह रायसिख ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उसका छह वर्षीय लड़का जगमीत सिंह उर्फ जग्गी पड़ौसी हरनाम सिंह के घर के आगे बच्चों के साथ खेल रहा था कि एकाएक गायब हो गया। उसके भानजे सोनू ने शाम करीब साढ़े सात बजे उसे सूचना दी कि दो अज्ञात युवक आए और अपनी बाइक पर लड़के जग्गी को अपहरण कर ले गए। करीब एक घंटे बाद साढ़े आठ बजे अज्ञात व्यक्ति ने उसके मोबाइल फोन पर बताया कि जग्गी का अपहरण हमने किया और पांच लाख रुपए दो, नहीं तो बच्चे को मार देंगे। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने गांव दुल्लापुर कैरी निवासी तरसेम सिंह पुत्र सुरेशचन्द व देवेन्द्र पुत्र जसपाल सोनी और चौमू के गोरीबास निवासी पंकज पुत्र बजरंग जाट को गिरफ्तार किया गया।
मोबाइल लोकेशन के आधार पर पकड़े गए अपहरणकर्ता
मोबाइल फोन की लोकेशन अपहरणकर्ता को पकडऩे में सहायक रही। पुलिस ने अपहरण हुए बालक के पिता के मोबाइल पर आई कॉल ट्रेस आउट की तो वह श्रीगंगानगर के बाजार क्षेत्र में एक होटल की निकली। इससे कडिय़ां जुड़ती गई और तीनों आरोपितों के एक दूसरे से किए गए संपर्क ने पूरी कहानी बयां कर दी। पुलिस ने वारदात के 48 घंटे में ही देवेन्द्र सोनी और तरसेम को गिरफ्तार कर लिया। इस बीच अपहरण बालक पुलिस को श्रीगंगानगर के मीरा चौक क्षेत्र में लावारिश हालत में रोते हुए मिला।
कोर्ट में बालक की गवाही ने दिलाई सजा
छह वर्षीय अपहृत बालक जगमीत सिंह उर्फ जग्गी ने कोर्ट में अपहरणकर्ताओं की पूरी कहानी बयां कर दी। यह बयान तीनों को सजा दिलाने में अहम रहा। जग्गी का कहना था कि देवेन्द्र उसके गांव का है और उसने टॉफी के बहाने उसे एक और आरोपित के साथ बाइक पर बिठाकर गांव तीन डी लेकर आया। उसने घर जाने की बात कही तो चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। अदालत में शिनाख्त परेड कराई तो बालक ने तीनों को पहचान लिया। जज के आदेश पर तीनों के नाम बयानों में अंकित किए गए।
तीनों आरोपित स्टूडेंट्स पर अपराध गंभीर
जज पलविन्द्र सिंह ने जब तीनों की आयु के बारे में पूछा। देवेन्द्र की आयु 24 साल, तरसेम की 22 साल और पंकज की आयु 22 साल बताई गई। बचाव पक्ष ने तीनों आरोपितों छात्र होने की बात कहते हुए नरम रुख अपनाने की गुहार की। लेकिन, अपर लोक अभियोजक ने सख्त सजा का आग्रह किया। अदालत ने तीनों को दोषी मानते हुए आईपीसी की धारा 364 ए में आजीवन कारावास व दो-दो हजार रुपए जुर्माना, धारा 363 व 365 में पांच-पांच साल कठोर कारावास व एक-एक हजार रुपए जुर्माना सुनाया।