श्री गंगानगर

पौने दो करोड़ का ठेका, जमा पौने बाईस लाख

बजट के आंकड़ों में परिषद प्रशासन की खानापूर्ति सामने आई
2 min read
• •
Updated: 23 Feb 2018, 8:13 AM IST
Feature image

श्रीगंगानगर.

नगर परिषद प्रशासन को सबसे ज्यादा राजस्व होर्डिंग्स ठेके से मिलता है। पिछले साल हुए इस ठेके से पौने दो करोड़ रुपए की आय का अनुमान लगाया गया। ठेका लेने में फर्मों में प्रतिस्पर्धा ऐसी कि यह ठेका परिषद के अनुमान को भी पार कर गया। यह बोली 1 करोड़ 78 लाख 20 हजार रुपए में तय की गई। ठेकेदार ने ठेके से पहले निर्धारित राशि 21 लाख 69 हजार रुपए जमा कराए, लेकिन बाद में परिषद प्रशासन को अंगूठा दिखा दिया।

ठेके की शेष राशि जमा कराने की बजाय पत्र व्यवहार के बाद हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर लाकर थमा दिया। आरोप प्रत्यारोप के बीच यह ठेका अब समाप्त हो चुका है, लेकिन परिषद के खजाने में सिर्फ 21 लाख 69 हजार रुपए की राशि ही जमा हो पाई है। यह खुलासा किसी पार्षद या सूचना के अधिकार कानून के तहत सूचना प्राप्त करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता का नहीं बल्कि नगर परिषद प्रशासन की ओर से 23 फरवरी को प्रस्तावित बोर्ड की बजट बैठक के दौरान बजट प्रस्ताव में यह अंकित किया गया है। अब तक परिषद के अधिकारी बार-बार यही दावा करते रहे कि ठेका राशि 95 लाख रुपए जमा हुई है, लेकिन हकीकत बजट की प्रति ने बयां कर दी है। यह बजट कॉपी पार्षदों तक नहीं पहुंची है।


ठेका फर्म को दिया अभयदान
नगर परिषद के खजाने में जमा होने की बजाय करीब डेढ़ करोड़ रुपए की राशि कौन जीम गया? इस सवाल का जवाब आयुक्त से लेकर लेखा शाखा के अधिकारियों और कार्मिकों के पास नहीं है। राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा, यह इसका जवाब देने के लिए संबंधित अधिकारियों ने एक दूसरे को अधिकृत बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जानबूझकर ठेका फर्म को राशि जमा कराने की बजाय उसे नोटिस देने का खेल खेला गया ताकि समय अवधि बीत जाएं। रही कही कसर ठेका फर्म ने खुद कर दी जब उसने कोर्ट से स्थगनादेश ले लिया। कोर्ट में भी परिषद की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं की गई। इस ठेकेदार को अभयदान देने के लिए अधिकारियों ने भी चुप्पी साध ली।


स्वस्थ भारत मिशन से महज दो करोड़
बोर्ड में पिछले साल के बजट में दस करोड़ रुपए का प्रावधान स्वस्थ भारत मिशन योजना के तहत आना था, लेकिन नगर परिषद प्रशासन को मिले सिर्फ 1 करोड़ 99 लाख 45 हजार रुपए का बजट। इस साल फिर से परिषद ने दस करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान स्वस्थ भारत मिशन योजना से दावा किया है, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस बार भी यह राशि नहीं मिल पाएगी।


आने थे सात करोड़, मिले डेढ़ करोड़
राज्य वित्त आयोग का अनुदान भी नगर परिषद के राजस्व के निराशाजनक रहा है। बजट के आंकड़े के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 में परिषद ने सात करोड़ रुपए राजस्व इस राज्य वित्त आयोग से महज 1 करोड़ 53 लाख 49 हजार रुपए राजस्व मिला, लेकिन शेष नहीं। अब फिर वित्तीय वर्ष 2018-19 में सात करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है।

Published on:
Also Read
View All
भारत-पाक बॉर्डर से आई बड़ी खबर, पाकिस्तानी ड्रोन से गिराए हेरोइन के पैकेट, 2 KM अंदर खेत में मिले

Rajasthan : गैंगस्टर आरजू बिश्नोई के पिता हथियार सप्लाई मामले में गिरफ्तार, स्पेशल टीम खंगाल रही नेटवर्क

मरुभूमि में सतलुज का पानी लाना नहीं था आसान, महाराजा गंगासिंह का वह कदम जिसने बदल दी पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर

Sri Ganganagar: सेंट्रल जेल में बंद बेटे से मिलने जेल पहुंचा पिता, जूतों में छिपाकर लाया टैबलेट और सफेद पाउडर; ऐसे हुआ खुलासा

श्रीगंगानगर में पदमपुर तहसील का पेशकार सस्पेंड, रिश्वत लेने का वीडियो वायरल होने पर एक्शन