रिश्वत मांगने के जुर्म में अदालत ने श्रीविजयनगर क्षेत्र के एक तत्कालीन सरपंच को दो साल कठोर कारावास व दस हजार रुपए जुर्माना से दंडित किया गया है।
श्रीगंगानगर.
रिश्वत मांगने के जुर्म में अदालत ने श्रीविजयनगर क्षेत्र के एक तत्कालीन सरपंच को दो साल कठोर कारावास व दस हजार रुपए जुर्माना से दंडित किया गया है।यह निर्णय मंगलवार को यहां भ्रष्टाचार निवारण मामलों की स्पेशल कोर्ट ने सुनाया। अपर लोक अभियोजक पवन जोशी ने बताया कि श्रीविजयनगर पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत चार बीएलडी के तत्कालीन सरपंच ओमप्रकाश कड़वासरा पुत्र रामप्रताप बिश्नोई ने 28 अगस्त 2012 में अपने ग्राम पंचायत क्षेत्र के चक एक बीएलएम निवासी सरोज पत्नी रमेश कुम्हार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर ज्वाइङ्क्षनग कराने के एवज में ढाई हजार रुपए रिश्वत मांगी थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरोज के पति रमेश ने रिश्वत मांगने के इस खेल की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो श्रीगंगानगर चौकी में की।
शिकायतकर्ता का कहना था कि बाल विकास परियोजना अधिकारी अनूपगढ़ ने उसकी पत्नी सरोज को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के लिए चयन किया।उसे एक महीने की ट्रेनिंग महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से दी गई लेकिन जब ज्वाइङ्क्षनग की बारी आई तो सरपंच ओमप्रकाश ने इनकार कर दिया। सरपंच का कहना था कि ज्वाइङ्क्षगन कराने का अधिकार उसका है, यदि ज्वाइन करना है तो ढाई हजार रुपए की रिश्वत लेकर आओ। ब्यूरो टीम जब तक यह ट्रैप करती तब तक उसे भनक लग चुकी थी। ऐसे में यह ट्रैप नहीं हो पाया, लेकिन रिश्वत मांगने के आरेाप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो टीम ने अदालत में चालान पेश किया।
इस धारा में कोर्ट का रुख सख्त
रिश्वत मंागने के मामले में पीसी एक्ट की धारा सात में सख्त सजा देने का प्रावधान है। कोर्ट ने इस धारा में अब तक अधिकांश आरोपितों को सजा दी है। तत्कालीन सरपंच के खिलाफ भी रिश्वत मांगने का आरोप था न कि रिश्वत लेने का। अदालत का कहना था कि जिन अधिकारियों या कार्मिकों या जनप्रतिनिधियों को आमजन की सुविधा के लिए अधिकार दिया है, वे ही यदि रिश्वत मांगेंगे तो व्यवस्था कैसे चलेगी। इस कारण अब तक कई आरोपितों को सख्त सजा हो चुकी है।