Unique Innovation: राजस्थान के रायसिंहनगर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक कंपलसरी विद्यालय, जो 1943 में स्थापित हुआ था, अब फिर से जीवंत हो उठा है।
Raisinghnagar Govt School Renovation: राजकीय उच्च माध्यमिक कंपलसरी विद्यालय रायसिंहनगर सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक धरोहर है। वर्ष 1943 में स्थापित इस विद्यालय ने प्रशासन, राजनीति, व्यापार और समाजसेवा को अनेक विशिष्ट व्यक्तित्व दिए।
वक्त के साथ यह विरासत उपेक्षा और संसाधनों की कमी का शिकार हो गई। जर्जर भवन, उखड़ती दीवारें और टूटा फर्नीचर तीन वर्ष पहले तक विद्यालय की यही पहचान बन चुकी थी। इस पीड़ा को विद्यालय के तत्कालीन कार्यवाहक प्रधानाचार्य दिनेश भादू ने महसूस किया। उन्होंने समस्या का हल सरकारी फाइलों तक सीमित रखने के बजाय एक भावनात्मक पहल की।
विद्यालय की ओर से पूर्व विद्यार्थियों को एक मार्मिक पाती लिखी। ‘मेरी सांसें थम रही हैं… मेरी सांसों को संरक्षण (आर्थिक संबल) की आवश्यकता है।’ मानो खुद स्कूल अपने बच्चों से मदद की गुहार लगा रहा हो। यह स्मृतियों को कुरेदने वाली पुकार थी, जिसने उन दिलों को छू लिया, जिन्होंने कभी इसी आंगन में सपने देखे थे।
इस अपील का सकारात्मक असर हुआ। अमरीका में रह रहे मनजीत सिंह सूदन, डॉ. जगमीत सिंह सूदन सहित देश-विदेश में बसे कई पूर्व विद्यार्थियों ने लाखों रुपए का सहयोग दिया।
इसके बाद भवन का रंग-रोगन हुआ, नए फर्नीचर व अलमारियां आईं और कक्षाओं में फिर से रौनक लौट आई। प्रधानाचार्य संदीप बिश्नोई ने बताया कि पूर्व छात्रों के सहयोग से आधारभूत सुविधाएं सुधरी हैं, लेकिन भवन विस्तार और शिक्षकों के पदों की कमी अब भी चुनौती बनी हुई है।
पाती में लिखे शब्द विद्यालय की आत्मा की पुकार थे। विश्वास था कि पूर्व विद्यार्थी इसे जरूर सुनेंगे। आज बदली तस्वीर देखकर आत्मसंतोष मिलता है।
दिनेश भादू, तत्कालीन कार्यवाहक प्रधानाचार्य