सरसों, आलू और अरंडी फसल होती है पाळे से प्रभावित
श्रीगंगानगर. सर्दी बढऩे के साथ-साथ फसलों में पाळा पडऩे की आशंका बढऩे लगी है। अगर, न्यूनतम तापमान तीन डिग्री सेंटीग्रेड से कम होता है तो किसानों को एहतियात बरतना होगा। खासकर सरसों, आलू और अरंडी की खेती करने वाले किसानों को सर्दी बढऩे के साथ फसलों को बचाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने होंगे। हालांकि, पाळा पडऩे पर पूर्ण प्रबंधन तो किसान नहीं कर सकते लेकिन कुछ उपाय करने से फसल को बचाया जा सकता है।
इसमें फसल में सिंचाई पानी देकर, धुआं करके और सल्फरिक एसिड का छिडक़ाव किया जा सकता है। तापमान तीन डिग्री से कम हो जाए और हवा का बहाव रुक जाए तो फसलों में पाळा पडऩे की पूरी आशंका रहती है। तापमान कम होने से पौधे के अंदर कोशिकाओं में पानी जमता है तो इसका आयतन बढ़ जाता है और कौशिकाभित्ती फट जाती है। इससे पौधे की मौत हो जाती है। पौधे में पुष्प अवस्था और दाना पडऩे के समय पाळे की आशंका रहती है।
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पाला पडऩे से दाना बदरंग और कमजोर हो जाता है। फूलों का निषेचन रुक जाता है। पौधे की बढ़वार भी रुक जाती है। जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। पाले से बचाव के लिए सल्फरिक एसिड का छिडक़ाव कर सकते हैं। इसका एक एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करना चाहिए। पहले छिडक़ाव के दस से पन्द्रह दिन बाद फिर से फसल में ये छिडक़ाव दोहराना चाहिए।
ये रखे सावधानियां
ढोलकी में पहले पानी डालें फिर गंधक का अम्ल डालें।
- धातु की ढोलकी का इस्तेमाल न करें।
- छिडक़ाव करते समय दस्ताने और मास्क पहनें।
- पानी की मात्रा फसल की बढ़वार के अनुसार निर्धारित करें।
- भरपूर मात्रा में पानी का इस्तेमाल करें।