ग्रामीणों में रोष, लगाया अनदेखी का आरोप। फिल्टर प्लांट पड़ा है बन्द
सूरतगढ़ थर्मल. सूरतगढ़ तापीय परियोजना की निकटवर्ती ग्राम पंचायत रईयावाली के वाशिन्दे सर्दियों में भी पेयजल सुविधा के लिए तरस रहे है। वहीं गांव में लगे फिल्टर प्लांट नही चलाने से घरों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। गांव में पेयजल हेतु छह डिग्गियों सहित हाल ही में निर्माणाधीन सुपर क्रिटिकल इकाइयों की नैगमिक सामाजिक उत्तरदायी नीति के तहत लाखो की लागत से ओवर हैड टँकी का निर्माण करवाया गया है। गाँव में बरसों से बनी छह पेयजल डिग्गियों में से ज्यादातर खाली पड़ी है।
इनमे से मात्र तीन डिग्गियों में ही पानी है। वो इतना गदला और काई युक्त है कि मनुष्य तो क्या मवेशियों के भी पीने लायक नही है। गाँव में सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण कुमार स्वामी ने बताया कि मात्र तीन डिग्गियों में काई जमा हरे रंग का पानी पड़ा है, लेकिन उसकी सप्लाई भी गाँव में नही की जा रही है। मजबूरन गाँव वालो को ऊँट गाड़ो अथवा टेंकर के द्वारा करीब 7 किमी दूर नहर से पानी लाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया की गाँव में पेयजल समस्या विगत एक वर्ष से बरकरार है।
ग्रामीण सत्य नारायण ने बताया की इस दूषित पेयजल से जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया की जलदाय विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही से फिल्टर प्लांट खराब पड़ा है। मंगलवार को जलदाय विभाग की डिग्गियों का निरीक्षण करने गये ग्रामीण शेराराम, जगदीश, गोपीराम, मोहन कुम्हार, ओम कुम्हार आदि ने बताया जयदाय विभाग मे ठेकेदार की मार्फ़त लगे कर्मचरियों से मिली जानकारी के अनुसार अधिकारियों के निर्देशो पर मात्र एक घण्टे फिल्टर चलाया जा रहा है।
जबकि हकीकत में फिल्टर चलाया ही नही जाता। नहर से डिग्गियों में आया एवम पहले से डिग्गियों म् पड़ा दूषित पानी ही सीधे ओवर हैड टैंक से गांव में सप्लाई किया जा रहा है। ओवर हैड टैंक का निर्माण- ग्रामीण कालू राम स्वामी ने बताया कि निर्माणाधीन सुपर क्रिटिकल इकाइयों के नैगमिक सामाजिक उत्तरदायी नीति के तहत आस पास के गाँवों में खर्च होने वाले 33 करोड़ रूपये में से परियोजना प्रशासन ने जनस्वास्थ्य एबम अभियांत्रिक विभाग को 47 लाख रूपये से गाँव में ओवर हैड टैंक का निर्माण करवाया गया है।
लेकिन इसका फायदा ग्रामीणों को नही मिल रहा है। इससे दिन में मात्र एक बार आधा घण्टे बिना फिल्टर का पेयजल सप्लाई किया जाता है। जिससे गांव के मोहल्ले प्यासे रह जाते है। इसके आलावा जलदाय विभाग द्वारा गाँव में 38 लाख रूपये की लागत से फिल्टर का निर्माण भी करवाया गया है। विभागीय अनदेखी के कारण गाँव की पेयजल डिग्गिया गन्दगी से भरी पड़ी है। विभागीय पक्ष- गाँव के नवनिर्मित ओवर हैड टैंक की कमीशनिंग हो चुकी है। इसके अलावा फिल्टर प्लांट को दो दिन पूर्व ही ट्रायल हेतु चलाया गया है।