राहगीर परेशानी झेल रहे हैं। मुख्यमंत्री के श्रीगंगानगर दौरे पर आने पर ग्रामीण मुख्यमंत्री को करेंगे शिकायत
मोरजंड़खारी. ग्रामीण अंचल में पिछले कुछ वर्षों से खराब सड़कों की दंश झेल रहे गाँव सरदारपुरा जीवन मम्मड़खेड़ा एवं आसपास के गांवो के लोगों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार सार्वजनिक निर्माण विभाग के उच्चधिकारियों को अवगत करवाने के बावजूद भी विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि जगह जगह से क्षतिग्रस्त सड़कों के समाचार बार बार समाचार पत्र सिर्फ राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता के साथ ग्रामीणों की आवाज उठा रहा है। इसके बावजूद विभाग के उच्चधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है।
टूटी सड़कों पर वाहन हिचकोले खा रहे हैं। सड़क पर बने गहरे गडडो से हर वक्त हादसे की आशंका बनी रहती है। विभाग व अधिकारियों द्वारा इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं देने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। श्रीगंगानगर- हनुमानगढ रोड़ पर ग्राम पंचायत मम्मड़खेड़ा से सरदारपुरा जीवन को जोड़ने वाली लिंक रोड़ एक साल से जगह जगह से क्षतिग्रस्त है। इस सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। इसी प्रकार ग्राम मम्मड़खेड़ा से निकलने वाली लिंक रोड़ जो गांव जमीयतसिंहवाला पनीवाली जोगीवाला रोटांवाली को आपस में जोड़ती है।
यह सड़क भी जगह जगह से क्षतिग्रस्त होने के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क के बीच में गहरे खड़ड़े पड़ गये है। जिसके कारण आये दिन छोटे मोटे हादसे हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री 4 जनवरी को श्रीगंगानगर दौरे पर आने पर इस सड़क की मुख्यमंत्री को शिकायत की जायेगी। ग्रामीण मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन देंगे। "एमएमके वितरिका के जल उपभोग संगम बीके 46 के अध्यक्ष बलवीर जांगीड़ का कहना है कि सरदारपुरा जीवन से लेकर मम्मड़खेड़ा तक सड़क बिल्कुल क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
विभाग व प्रशासन को कई बार अवगत करवा दिया गया है। इसके बावजूद विभाग व प्रशासन ग्रामीण सड़कों की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं। विभाग को समय समय पर सड़कों की सुध लेनी चाहिए। ताकि किसी का घर बर्बाद न हो। विभाग व अधिकारियों को शायद कोई बड़े हादसे का इंतजार है। "अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष कुलदीप संधू का कहना है कि सरकार व प्रशासन को जनता की बिलकुल ही आवश्यकता नहीं है। ग्रामीण बार बार समाचार पत्रों के माध्यम से अपनी समस्याओं को उठा रहे हैं। लेकिन फिर भी जिला प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी ग्रामीणों की समस्याओं पर गौर नहीं कर रहे हैं।"