श्री गंगानगर

Video: रेल सुविधाओं के लिए तरस रहा अनुपगढ़

भारत -पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित अनूपगढ़ रेलवे सुविधाओ के लिए तरस रहा है।
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Updated: 20 Sep 2017, 3:43 PM IST
Video: railway facilities in bad situation
Video: railway facilities in bad situation

अनूपगढ़ में पहली बार सन 1927 में रेल की सीटी सुनाई दी। शुरू में हफ़्ते में 2 बार यहां रेल का आवागमन होता था।लोगों में विश्वास था कि समय के साथ यहां रेल सुविधाओं का विकास हो जाएगा। मगर यह अफसोस कि बात कहेंगे कि समय के साथ रेल सेवाओं में वांछित विकास नही हो पाया। अनूपगढ़ से बीकानेर तथा अनूपगढ़ से श्रीगंगानगर रेल की मांग जोर पकड़ रही है। 9 दशक बीत जाने के बाद भी अनूपगढ़ से बीकानेर तथा अनूपगढ से गंगानगर रेल की मांग लंबित है रेल संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने स्टेशन अधीक्षक से मिल कर रेल सुविधाओं में विस्तार करने की मांग को उठाया है। रेल संघर्ष समिति ने स्टेशन अधीक्षक से निम्न मांगो को उठाया है साथ ही इससे पूर्व भी कई बार रेल मंत्री को रेल को पत्र लिखकर अपनी मांगों से अवगत करवाया है। यह है संभावनाएं।

भटिंडा से अनूपगढ़ तक हो एक्सप्रेस रेल सेवा

भटिंडा से अनूपगढ़ तक हो एक्सप्रेस रेल सेवा अनूपगढ़ रेल संघर्ष समिति द्वारा देश के नए रेल मंत्री पीयूष गोयल तथा उत्तर-पश्चिम रेलवे मंडल के अधिकारियों से लगातार पत्र व्यवहार कर भटिंडा से अनूपगढ़ के लिए सुबह लगभग 6 बजे एक एक्सप्रेस रेल सेवा शुरू करने तथा सूरतगढ-अनूपगढ पैसेंजर रेल सेवा के फेरे बढाए जाने की मांग उठाई गई है। संघर्ष समिति के प्रवक्ता ओम चुघ, अध्यक्ष जलंधर सिंह तूर, संरक्षक गंगाविशन सेतिया कई बार रेल मंत्री को पत्र से अवगत करवाया कि अनूपगढ़ के अलावा घड़साना रावला क्षेत्र में पंजाब राज्य के लोगों की सख्ंया बहुत अधिक है तथा पंजाब-हरियाणा हेतु अनूपगढ़ रेलवे स्टेशन से लोगों को आवागमन काफी होता है।

भारत-पाक सीमा पर होने की वजह से सेना एवं बी.एस.एफ . के नजरीये से भी अनूपगढ़ का पंजाब से सीधा सम्पर्क होना बहुत ही आवश्यक है। ऐसे में अगर भटिंडा से सुबह एक्सप्रेस रेल सेवा अनूपगढ़ के लिए शुरू की जाए तो भारी राजस्व की प्राप्ति रेलवे को होगी और यात्रियों को सुविधा प्रदान होगी। समिति के पदाधिकारियों ने रेल मंत्री को अवगत करवाया हुआ है कि रेलवे को इस क्षेत्र से अच्छी खासी आय प्राप्त होने के बावजूद भी अनूपगढ़ रेल सेवाओं के मामले में लगातार पिछड़ा हुआ है, इसलिए लम्बी दूरी की रेल सेवाओं का अभाव बना हुआ है तथा राजनीतिक रूप से क्षेत्र की बड़े पैमाने पर उपेक्षा की जा रही है।

पत्र में इसके अलावा रेल मंत्री को लिखा गया कि श्रीगंगानगर से शाम को 7-30 बजे सूरगतढ़ के लिए चलने वाली रेल का संचालन सही मायने में अनूपगढ़ से होना चाहिए, रेलवे विभाग ने इस रेल को सूरतगढ़ भेजकर अनूपगढ़ की जनता के साथ अन्याय किया है। वैसे भी वर्तमान में सूरतगढ़ से यह रेल रात्रि के समय खाली चलती है, लेकिन अगर इस रेल को रात्रि में लगभग 11-30 अनूपगढ़ से वापसी श्रीगंगानगर के लिए चलाया जाए तो अनूपगढ़ जिला मुख्यालय से जुड़ेगा साथ ही सुबह 4 बजे श्रीगंगानगर से हरिद्वार के लिए जाने वाली इंटरसिटी रेल एवं दिल्ली के लिए जाने वाली रेल सेवा के अलावा पंजाब जाने वाली रेलों से भी जुड़ जाएगा।

इस रेल का संचालन अनूपगढ से करने पर रेलवे को भारी राजस्व प्राप्त होगा। वहीं श्रीगंगानगर से अनूपगढ़ के लिए डेमू रेल शुरू करने की मांग के तहत बताया गया कि इस रेल के आरभ होने पर रेलवे विभाग को सरूपसर में पावर चेंज करने वाली समस्या का सामना भी नहीं करना होगा, क्योंकि डेमू रेल में दोनों ओर पावर होती है। पत्र में इसके अलावा अनूपगढ़ को पावर चेंज किए बिना जिला मुख्यालय श्रीगंगानगर से जोडऩे केलिए सरूपसर से पहले 1 किमी का बाई पास रेल टुकडा बनाने का मुद्दा भी उठाया गया है।

रायसिंहनगर से से बीकानेर तक रेल लाईन बिछाई जाए

अनूपगढ़ विकास सेवा समिति के अध्यक्ष राजीव डांग एवं कोषाध्यक्ष शंकर जिन्दल ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं रेलवे सचिव तक यह मुद्दा पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि रायसिंहनगर से बीकानेर तक रेल बिछाने के लिए सर्वे हो चुका है, लेकिन अभी तक रेलवे लाईन बिछाने का कार्य आरभ नहीं किया गया है। समिति अध्यक्ष डांग के अनुसार वर्तमान में सूरतगढ़ बठिंडा रेलवे ट्रेक पर प्रतिदिन कोयले के 4-5 रैक आने-जाने एवं माल गाडिय़ों के आवागमन के कारण वह टे्रक अधिक व्यस्त रहता है, ऐसे में अगर रायसिंहनगर से बीकानेर तक रेल लाईन बिछा दी जाए तो काफी सुविधा मिलेगी।

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